सितंबर 2026 तक के आंकड़ों में भारतीय लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए एक बड़ी चिंता सामने आई है। कंपनियों का टोटल प्रीमियम कलेक्शन तो बढ़ा है, लेकिन रिटेल एपे (Retail APE) यानी नए व्यक्तिगत बिजनेस में सुस्ती देखी जा रही है, जो निवेशकों के लिए संशय का विषय है।
लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर में इस समय 'परफॉर्मेंस मिसमैच' साफ दिख रहा है। सितंबर 2026 के डेटा के अनुसार, जहां कंपनियां हेडलाइन प्रीमियम में उछाल दिखा रही हैं, वहीं रिटेल एनुअलाइज़्ड प्रीमियम इक्विवेलेंट (Retail APE) में गिरावट या स्थिरता निवेशकों के लिए चिंता का सबब बनी हुई है।
प्रमुख खिलाड़ियों का हाल
- ICICI Prudential Life: कंपनी का टोटल प्रीमियम 53% उछला, लेकिन रिटेल एपे में सिर्फ 1% की मामूली ग्रोथ रही। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी का जोर ग्रुप पॉलिसीज पर ज्यादा रहा।
- HDFC Life: यहां स्थिति बेहतर रही, जहां टोटल प्रीमियम में 36% और रिटेल एपे में 24% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई।
- SBI Life: कंपनी के लिए महीना चुनौतीपूर्ण रहा, जहां टोटल प्रीमियम ग्रोथ घटकर 2% रह गई और रिटेल एपे में 2% की गिरावट आई।
- Axis Max Life: यहां प्रीमियम 7.4% और रिटेल एपे में 4% की धीमी लेकिन स्थिर वृद्धि दिखी।
क्यों अहम है Retail APE?
रिटेल एपे सीधे तौर पर कंपनियों की आने वाले वर्षों की कमाई की क्षमता को दर्शाता है। जब टोटल प्रीमियम बढ़ता है लेकिन रिटेल एपे स्थिर रहता है, तो यह माना जाता है कि कंपनी का बिजनेस ग्रुप या सिंगल प्रीमियम जैसे कम मार्जिन वाले उत्पादों पर निर्भर है, जो लॉन्ग-टर्म में टिकाऊ नहीं होते। यही कारण है कि सितंबर के अंत में इंश्योरेंस सेक्टर के शेयरों पर दबाव बढ़ा है।
आगे की राह
रेगुलेटरी बदलाव जैसे 'सबका बीमा सबकी रक्षा एक्ट, 2025' और जीएसटी नियमों में बदलाव के कारण कंपनियां अपने मार्जिन को लेकर सतर्क हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए एनालिस्ट 11-12% की रिटेल एपे ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या कंपनियां अपनी रणनीति में बदलाव कर व्यक्तिगत रिटेल पॉलिसीज पर वापस ध्यान केंद्रित कर पाती हैं या नहीं।
