भारत का लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर अब तेजी से AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को अपना रहा है, जिससे अंडरराइटिंग और नए प्रोडक्ट लॉन्च की रफ्तार कई गुना बढ़ गई है। IRDAI ने साल 2026 में इसके लिए खास वर्किंग ग्रुप का गठन किया है, ताकि टेक्नोलॉजी के साथ पारदर्शिता और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
भारतीय बीमा क्षेत्र एक बड़े तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब कंपनियां छोटे पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर पूरे सिस्टम में AI को इंटीग्रेट कर रही हैं। इससे इंश्योरेंस कंपनियां प्रोडक्ट डिजाइन से लेकर रिस्क असेसमेंट तक हर काम को बहुत तेजी से कर पा रही हैं, जिससे नए प्रोडक्ट्स को मार्केट में लाने का समय महीनों से घटकर कुछ ही घंटों का रह गया है।
अंडरराइटिंग और प्राइसिंग में AI का असर
इंश्योरेंस फर्म्स के लिए रिस्क अंडरराइटिंग का तरीका पूरी तरह बदल रहा है। पहले मधुमेह (Diabetes) जैसी बीमारियों वाले लोगों को महंगे प्रीमियम देने पड़ते थे या बीमा लेने में दिक्कत आती थी। लेकिन अब डेटा-ड्रिवन प्राइसिंग मॉडल्स से कंपनियां उन लोगों तक भी पहुँच रही हैं जो पहले सिस्टम से बाहर थे। साल 2030 तक भारत में 10.1 करोड़ मधुमेह के मरीज होने का अनुमान है, जिसे देखते हुए मशीन लर्निंग मॉडल के जरिए कंपनियां अब रियल-टाइम में सटीक निर्णय ले रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 82% इंश्योरेंस कंपनियां मशीन लर्निंग का उपयोग कर रही हैं और 75% अंडरराइटिंग फैसले अब इन्हीं मॉडल्स से प्रभावित हैं।
IRDAI की सख्ती और गवर्नेंस
तेजी से बढ़ते AI के इस्तेमाल को देखते हुए, इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने साल 2026 में एक विशेष AI वर्किंग ग्रुप बनाया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI द्वारा लिए गए निर्णय पारदर्शी हों और उनमें मानवीय जवाबदेही बनी रहे। कंपनियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी ऑटोमेटेड प्रक्रियाओं को निष्पक्ष और सुरक्षित साबित करने की है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
निवेशकों को केवल कंपनी की ग्रोथ के नंबर्स नहीं देखने चाहिए, बल्कि उन पर भी नजर रखनी चाहिए जो डिजिटल गवर्नेंस और साइबर सिक्योरिटी को लेकर गंभीर हैं। जो कंपनियां हाई-स्पीड ऑपरेशंस और नैतिक डेटा उपयोग के बीच संतुलन बनाए रखेंगी, वही लंबी अवधि में रिस्क को बेहतर ढंग से मैनेज कर पाएंगी। नियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) पर नजर रखना भी निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि किसी भी चूक का सीधा असर कंपनी के स्टॉक और साख पर पड़ सकता है।
