Indian Insurers: इक्विटी में निवेश घटा, सितंबर तिमाही में ₹8,013 करोड़ पर सिमटी खरीदारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Insurers: इक्विटी में निवेश घटा, सितंबर तिमाही में ₹8,013 करोड़ पर सिमटी खरीदारी

सितंबर तिमाही के दौरान भारतीय इंश्योरेंस कंपनियों ने शेयर बाजार में अपना निवेश काफी कम कर दिया है। पिछले क्वार्टर में जहां निवेश **₹18,087 करोड़** था, वहीं अब यह घटकर **₹8,013 करोड़** रह गया है। यह फैसला मुख्य रूप से रेगुलेटरी सॉल्वेंसी जरूरतों और बाजार की अस्थिरता को देखते हुए लिया गया है।

बाजार से दूरी का असली कारण

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण IRDAI (भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण) के कड़े नियम हैं। सभी बीमा कंपनियों के लिए 150 प्रतिशत का सॉल्वेंसी मार्जिन बनाए रखना अनिवार्य है। यह एक तरह का फाइनेंशियल कुशन होता है जो क्लेम सेटलमेंट के लिए जरूरी है। बाजार में भारी गिरावट आने पर इक्विटी पोर्टफोलियो की वैल्यू कम हो जाती है, जिससे सॉल्वेंसी रेशियो पर दबाव बनता है। ऐसे में कंपनियां सुरक्षित एसेट एलोकेशन की ओर बढ़ रही हैं।

क्यों सुरक्षित है बॉन्ड मार्केट?

जहां शेयर बाजार में रोज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं, वहीं बॉन्ड मार्केट अधिक स्थिर रिटर्न दे रहा है। सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) और हाई-क्वालिटी कॉरपोरेट बॉन्ड पर मिलने वाली बेहतर यील्ड इंश्योरेंस कंपनियों के लिए आकर्षक विकल्प बनी हुई है। बॉन्ड को अक्सर उनकी कॉस्ट प्राइस पर अकाउंट किया जाता है, जिससे बैलेंस शीट बाजार के रोजमर्रा के उतार-चढ़ाव से बची रहती है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

इंश्योरेंस कंपनियां भारतीय बाजार में लिक्विडिटी का एक बड़ा जरिया हैं। हालांकि, यह कदम पूरी तरह से 'टैक्टिकल' है, यानी लॉन्ग-टर्म एग्जिट नहीं है। अगर भविष्य में बाजार की वोलेटिलिटी कम होती है या बॉन्ड यील्ड में बदलाव आता है, तो ये कंपनियां वापस इक्विटी में बड़ी खरीदारी शुरू कर सकती हैं। फिलहाल, निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के सॉल्वेंसी रेशियो और इंटरेस्ट रेट्स पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.