यह बड़ा पॉलिसी बदलाव बीमा सेक्टर में भरपूर विदेशी कैपिटल (Capital) लाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बीमा पहुंचाने के मकसद से किया गया है। उम्मीद है कि इससे मार्केट में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Competition) बढ़ेगी, जिससे देसी और विदेशी कंपनियां अपनी सेवाओं को और बेहतर बनाने पर जोर देंगी। सरकार का मानना है कि इससे देश के वित्तीय सेक्टर (Financial Sector) को भी बड़ी मजबूती मिलेगी और ग्लोबल टेक्नोलॉजी का भी फायदा उठाया जा सकेगा।
LIC की कैप 20% पर बरकरार
हालांकि, पूरे सेक्टर के लिए 100% FDI का रास्ता खुलने के बावजूद, सरकारी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) में विदेशी निवेश की सीमा 20% पर ही कायम रहेगी। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) लाइसेंसिंग और अन्य अप्रूवल की निगरानी जारी रखेगी ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे।
पड़ोसी देशों से निवेश पर सख्त नियम
नए नियमों के तहत, भारत के साथ जमीन सीमा साझा करने वाले देशों, जैसे चीन और हांगकांग, के निवेशकों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। पहले इन देशों से छोटे निवेश के लिए भी सरकारी मंजूरी लेनी पड़ती थी। अब नए नियमों से वे ऑटोमेटिक रूट से 10% तक निवेश कर सकेंगे, लेकिन इस बात की बारीकी से जांच की जाएगी कि कंपनी का असल मालिक (Beneficial Owner) कौन है। यह पुराने सख्त नियमों को बदलकर किया गया है।
बिल का आधार
यह अहम बदलाव "सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) बिल, 2025" के बाद आया है। इस बिल के जरिए ही बीमा सेक्टर में FDI की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य बीमा कवरेज बढ़ाना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और देश के बीमा बाजार में Competition को बढ़ावा देना है।
