देश के नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर में फाइनेंशियल ईयर **2027** की पहली छमाही में **8.9%** की ग्रोथ देखी गई है। कुल प्रीमियम कलेक्शन **₹1.79 लाख करोड़** रहा है, जहां हेल्थ इंश्योरेंस की डिमांड ने सेक्टर को संभाला, वहीं एग्रीकल्चर इंश्योरेंस में **57%** की भारी गिरावट ने रफ्तार धीमी कर दी है।
हेल्थ इंश्योरेंस बन रहा ग्रोथ का इंजन
इस सेक्टर की असली ताकत फिलहाल हेल्थ इंश्योरेंस बनी हुई है। स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने प्रीमियम में लगभग 31% का उछाल दर्ज किया है, जो बढ़कर ₹25,586 करोड़ पर पहुंच गया है। रिटेल ग्राहकों की बढ़ती डिमांड के कारण HDFC ERGO, Tata AIG, SBI General, और IFFCO-Tokio जैसी बड़ी प्राइवेट कंपनियों ने डबल डिजिट ग्रोथ हासिल की है। अगर एग्रीकल्चर सेक्टर को अलग कर दिया जाए, तो इंडस्ट्री की असल ग्रोथ 11.7% निकलकर आती है।
एग्री सेगमेंट का 'ब्रेक'
सरकारी योजनाओं जैसे 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' में बदलाव के चलते क्रॉप इंश्योरेंस का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है। पिछले साल के ₹6,703 करोड़ के मुकाबले इस बार प्रीमियम 57% घटकर मात्र ₹2,866 करोड़ रह गया है। यह गिरावट सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स पर आधारित बिजनेस की अनिश्चितता को दर्शाती है।
निवेशकों के लिए संकेत
कमर्शियल लाइन्स जैसे फायर और प्रॉपर्टी इंश्योरेंस में भी कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतों पर दबाव है। निवेशकों के नजरिए से देखें तो हेल्थ इंश्योरेंस का लगातार बढ़ना रिटेल कंजम्पशन का एक पॉजिटिव संकेत है, जो इंश्योरेंस कंपनियों के लिए लंबी अवधि में ज्यादा प्रॉफिटेबल साबित हो सकता है।
