क्यों बढ़ी थर्ड-पार्टी (TP) प्रीमियम की रफ्तार?
मोटर इंश्योरेंस मार्केट में यह बड़ा बदलाव VAHAN डेटाबेस के इस्तेमाल और बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का नतीजा है। सरकार ने सख्ती से नियमों का पालन करवाना शुरू कर दिया है। पहली बार पकड़े जाने पर ₹2,000 का जुर्माना और बार-बार पकड़े जाने पर जेल तक का प्रावधान है। इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, पहले लगभग 44% गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के चल रही थीं। अब सख्ती से ये लोग भी TP इंश्योरेंस खरीद रहे हैं, जिससे इस सेगमेंट में जबरदस्त ग्रोथ आई है। फाइनेंशियल ईयर 26 के लिए TP प्रीमियम रेट्स में 18% से 25% तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी है, जो चार साल के फ्रीज के बाद आया है। अगर यह मंजूर हुआ तो TP प्रीमियम और बढ़ेगा।
Own-Damage (OD) ग्रोथ धीमी क्यों पड़ी?
Own-Damage (OD) प्रीमियम की ग्रोथ सीधे तौर पर नई गाड़ियों की बिक्री से जुड़ी है, जो फिलहाल थोड़ी धीमी है। प्राइवेट कारों के इंश्योरेंस खर्च का लगभग 80% हिस्सा OD प्रीमियम का होता है। ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में भी बदलाव आ रहे हैं। Maruti Suzuki और Hyundai Motor India जैसी कंपनियों की मार्केट हिस्सेदारी घटकर करीब 50% रह गई है। वहीं, Tata Motors और Mahindra & Mahindra जैसी कंपनियां, जिनकी गाड़ियों में मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स का खर्च कम आता है, वे आगे बढ़ रही हैं। इससे इंश्योरर्स को OD प्रीमियम तय करने में थोड़ी सहूलियत हुई है। लेकिन, गाड़ियों की कुल बिक्री में कमी का असर OD प्रीमियम पर दिख रहा है।
इंश्योरर्स की मुनाफा (Profitability) पर क्या होगा असर?
TP और OD प्रीमियम की ग्रोथ में इस अंतर से जनरल इंश्योरर्स की मुनाफा (Profitability) को लेकर तस्वीर थोड़ी जटिल हो गई है। जहां TP सेगमेंट में सख्ती के चलते पॉलिसियों की संख्या बढ़ रही है, वहीं यह सेगमेंट रेगुलेटेड रेट्स और बढ़ते क्लेम कॉस्ट के कारण ऐतिहासिक रूप से कम मुनाफे वाला रहा है। दूसरी ओर, OD पॉलिसियां, जो गाड़ियों की बिक्री से जुड़ी हैं, आमतौर पर बेहतर अंडरराइटिंग मार्जिन देती हैं। ऑटो मार्केट में शिफ्ट से क्लेम कॉस्ट में थोड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन, कुल मिलाकर मोटर इंश्योरेंस की अंडरराइटिंग प्रॉफिटेबिलिटी धीरे-धीरे ही सुधरेगी। पब्लिक सेक्टर इंश्योरर्स जैसे New India Assurance और Oriental Insurance को सॉल्वेंसी और प्रॉफिटेबिलिटी की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, ICICI Lombard जैसे प्राइवेट प्लेयर्स बेहतर स्थिति में हैं। भारत का जनरल इंश्योरेंस सेक्टर 2030 तक ₹5.4 trillion तक पहुंचने का अनुमान है।
जोखिम और आगे की राह
TP प्रीमियम में बढ़ोतरी टॉप-लाइन ग्रोथ तो बढ़ाएगी, लेकिन यह काफी हद तक रेगुलेटरी एक्शन पर निर्भर है। TP इंश्योरेंस, जो हमेशा से कम मार्जिन वाला या घाटे का सेगमेंट रहा है, की प्रॉफिटेबिलिटी तभी सुधरेगी जब रेट्स क्लेम कॉस्ट के हिसाब से एडजस्ट होंगे। OD ग्रोथ गाड़ियों की बिक्री के साइक्लिकल नेचर से बंधी है। इंश्योरर्स इस माहौल में आक्रामक डिस्काउंटिंग, बढ़ते डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट और इलेक्ट्रिक गाड़ियों जैसी नई टेक्नोलॉजी से आने वाली चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। NIFTY Auto इंडेक्स का P/E 30.84 है, जो निवेशकों का भरोसा दिखाता है, लेकिन ओवरवैल्यूएशन का जोखिम भी है।
फाइनेंशियल ईयर 26 से 2030 के बीच भारतीय जनरल इंश्योरेंस सेक्टर में 10% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है। लेकिन मोटर इंश्योरेंस सेक्टर को वॉल्यूम ग्रोथ के साथ-साथ TP और OD सेगमेंट दोनों में प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव का सामना करना पड़ेगा।
