मोटर इंश्योरेंस में 'धोखाधड़ी'? ऊंचे कमीशन का खेल, ग्राहक हो रहे शिकार

INSURANCE
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
मोटर इंश्योरेंस में 'धोखाधड़ी'? ऊंचे कमीशन का खेल, ग्राहक हो रहे शिकार
Overview

इंडिया का मोटर इंश्योरेंस मार्केट, जो **$10 अरब** तक पहुंचने की ओर है, इस समय मिस-सेलिंग की समस्या से जूझ रहा है। सेल्स एजेंट्स ऊंचे 'अपफ्रंट कमीशन' के लालच में अक्सर ग्राहकों को उनकी जरूरत के बजाय, खुद के फायदे वाली पॉलिसी बेच देते हैं।

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कमीशन का जाल और मिस-सेलिंग का खेल

इंडिया के मोटर इंश्योरेंस सेक्टर में मिस-सेलिंग की सबसे बड़ी वजह इसका 'कमीशन सिस्टम' है। एजेंट्स और ब्रोकर्स अपनी आमदनी के लिए 'फर्स्ट-ईयर कमीशन' पर बहुत ज्यादा निर्भर रहते हैं। ऐसे में, उनकी प्राथमिकता ग्राहक की जरूरत को समझने से ज्यादा, ज्यादा कमीशन वाली पॉलिसी जल्दी बेचने की होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्राइवेट कार के 'own damage' कंपोनेंट्स पर 15% से 20% या इससे भी अधिक कमीशन मिल सकता है। इसी वजह से वे ग्राहक के लिए सही न होने पर भी, अपने लिए ज्यादा मुनाफे वाली पॉलिसी बेच देते हैं।

पॉलिसी में घालमेल, ग्राहक परेशान

मिस-सेलिंग कई तरह से होती है। इसमें थर्ड-पार्टी कवर को ही कॉम्प्रिहेंसिव बताकर बेच देना, पॉलिसी के जरूरी एक्सक्लूजन (जैसे इंजन डैमेज) को छिपाना, या प्रीमियम बढ़ाने के लिए फालतू ऐड-ऑन जोड़ना शामिल है। कभी-कभी 'Insured Declared Value' (IDV) को कम कर दिया जाता है ताकि पॉलिसी सस्ती लगे, लेकिन गाड़ी के टोटल लॉस होने पर मिलने वाला क्लेम अमाउंट भी कम हो जाता है।

शिकायतों में इजाफा, रेगुलेटर चिंतित

इन समस्याओं के चलते ग्राहकों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। खास तौर पर 'अनुचित व्यापार व्यवहार' (Unfair Business Practices) यानी मिस-सेलिंग से जुड़ी शिकायतों में 'फाइनेंशियल ईयर 25' में 14% की बढ़ोतरी देखी गई है, जो बढ़कर 26,667 केस तक पहुंच गई हैं। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI इसे एक 'गंभीर चिंता' का विषय मान रहा है।

मार्केट की ग्रोथ पर असर

ऐसे में, जब यह मार्केट 2025 में करीब $9.37 अरब से बढ़कर 2026 में $10.23 अरब होने का अनुमान है, तो यह ग्रोथ ऐसे ग्राहकों पर टिकी है जो शायद असंतुष्ट हों। यह मिस-सेलिंग कार डीलरशिप्स, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और एजेंट्स के जरिए भी हो रही है।

रेगुलेटर के एक्शन और भविष्य की राह

IRDAI इन दिक्कतों को दूर करने के लिए सक्रिय है। 'सबका बीमा सबकी रक्षा बिल, 2025' के जरिए रेगुलेटर को नए अधिकार मिले हैं, जिनमें कमीशन की सीमा तय करना और कंपनियों को ग्राहकों को ज्यादा स्पष्ट जानकारी देने के लिए बाध्य करना शामिल है। हालांकि, 'अनुचित व्यापार व्यवहार' वाली शिकायतों का लगातार बढ़ना यह दिखाता है कि जमीनी स्तर पर बदलाव आने में वक्त लग रहा है।

ऊंचे कमीशन और खराब डिस्क्लोजर सिस्टम के ये जोखिम बाजार के लिए खतरनाक हैं। इससे ग्राहकों को लंबे समय तक खुश रखने के बजाय, तत्काल बिक्री पर जोर दिया जा रहा है। भविष्य में, 'डेफर्ड कमीशन' जैसे सिस्टम पर विचार किया जा रहा है ताकि ऐसी पॉलिसी को बढ़ावा मिले जो लंबे समय तक चलें। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये सुधार एजेंट्स की कमाई और ग्राहकों की जरूरत के बीच सही संतुलन बना पाते हैं, या यह मार्केट मिस-सेलिंग के जाल में फंसा रहता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.