सेक्टर में आई ज़बरदस्त रिकवरी
FY26 का यह 15.7% का ग्रोथ रेट, FY25 में दर्ज 5.1% और FY24 में 2.0% की मामूली ग्रोथ के मुकाबले काफी अच्छी रिकवरी दिखाता है। मार्च 2026 के अंत में तो प्रीमियम कलेक्शन में 23.5% की सालाना वृद्धि देखी गई, जो साल के अंत की रस्मों और पिछले साल के बेस इफ़ेक्ट का नतीजा था।
हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स की बढ़ी डिमांड
NBP में यह तेज़ी, पॉलिसी वॉल्यूम में 4.7% की बढ़ोतरी (जो 2.83 करोड़ तक पहुंची) से कहीं ज़्यादा है। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि अब कंपनियां और ग्राहक, ज़्यादा वैल्यू वाली इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रहे हैं, यानी एवरेज पॉलिसी का साइज़ बढ़ा है।
ग्रोथ के मुख्य इंजन
ग्रुप इंश्योरेंस सेगमेंट इस ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन रहा। ग्रुप सिंगल प्रीमियम कलेक्शन 17.5% बढ़कर ₹2.49 लाख करोड़ हो गया, जबकि ग्रुप इयरली रिन्यूएबल प्रीमियम में 39% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंडिविजुअल सेगमेंट ने भी स्थिर ग्रोथ दिखाई, जिसमें नॉन-सिंगल प्रीमियम 10.1% और सिंगल प्रीमियम 12.3% बढ़े।
सरकारी बनाम प्राइवेट प्लेयर्स
प्राइवेट सेक्टर के इंश्योरेंस कंपनियों का NBP सामूहिक रूप से 16.75% बढ़कर ₹1.99 लाख करोड़ पर पहुंच गया। यह सरकारी कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के 14.91% के ग्रोथ (जो ₹2.60 लाख करोड़ रहा) से थोड़ा ही बेहतर है। LIC ने अपना मार्केट शेयर लगभग 56.66% बनाए रखा है। प्रमुख प्राइवेट कंपनियों जैसे Axis Max Life ने दमदार ग्रोथ दिखाई, लेकिन HDFC Life और ICICI Prudential Life जैसी कुछ बड़ी कंपनियों के मार्च के नतीजे थोड़े फीके रहे और पूरे फाइनेंशियल ईयर में थोड़ी गिरावट भी देखी गई।
रेगुलेटरी बदलावों का असर
FY26 में 15.7% की ग्रोथ, पिछले दो सालों की धीमी रफ़्तार के बाद एक महत्वपूर्ण उछाल है। इस रिकवरी का एक कारण इंडस्ट्री का लेट 2024 में आए रेगुलेटरी बदलावों को अपनाना भी है। इसमें इंडिविजुअल लाइफ पॉलिसियों पर GST हटाने का फैसला शामिल था, जिसने अफोर्डेबिलिटी (सस्ती कीमत) बढ़ाई और खासकर प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स की डिमांड को बढ़ाया। इससे पहले, सेक्टर ने 2008 के बाद की चुनौतियों का सामना किया था और FDI लिमिट में हुई बढ़ोतरी (जो अब 100% है) से फायदा उठाया था। हालांकि, मौजूदा ग्रोथ ज़्यादातर प्रोडक्ट मिक्स पर आधारित है, जो क्वालिटी और परसिस्टेंसी (पॉलिसी को जारी रखना) पर ज़ोर देती है, न कि सिर्फ़ वॉल्यूम पर।
आर्थिक हालात और भविष्य का अनुमान
भारत की मज़बूत आर्थिक बुनियाद, जैसे GDP ग्रोथ, बढ़ती प्रति व्यक्ति आय, शहरीकरण और वित्तीय व जोखिम के प्रति बढ़ती जागरूकता, इस सेक्टर के विस्तार को बल दे रही है। डिजिटलाइजेशन ने भी इसमें आग में घी का काम किया है। FDI, ब्रॉड मनी सप्लाई और ग्रॉस कैपिटल फॉर्मेशन जैसे मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतकों को इंश्योरेंस सेक्टर की ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण पॉजिटिव ड्राइवर माना गया है।
हालांकि, एनालिस्ट्स FY27 में ग्रोथ के धीमे पड़ने की उम्मीद कर रहे हैं। वे लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर के लिए 8-11% ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं। यह मंदी हाल के रेगुलेटरी बदलावों को मार्केट के अपनाने और बढ़ती जियोपॉलिटिकल और मार्केट की अनिश्चितताओं के कारण आ सकती है।
बढ़ता 'प्रोटेक्शन गैप'
NBP में शानदार ग्रोथ के बावजूद, एक गंभीर समस्या बनी हुई है - जीवन बीमा 'प्रोटेक्शन गैप', जिसका अनुमान राष्ट्रीय स्तर पर 87% लगाया गया है। यह गैप 18-35 साल के युवाओं में 90% से भी ज़्यादा है, जिनकी इंश्योरेंस लेने की औसत उम्र 28 साल है।
affordability और मार्केट की अस्थिरता
भले ही एवरेज पॉलिसी वैल्यू बढ़ रही है, लेकिन यह प्रवृत्ति ज़्यादातर लोगों के लिए इंश्योरेंस को कम किफायती बना सकती है। ग्रुप पॉलिसियों और हाई-वैल्यू इंडिविजुअल प्रोडक्ट्स पर ग्रोथ का फोकस बताता है कि यह विस्तार पूरे जनसांख्यिकीय स्पेक्ट्रम में व्यापक वित्तीय सुरक्षा तक नहीं पहुंच रहा है। इसके अलावा, इक्विटी मार्केट की अस्थिरता और जियोपॉलिटिकल टकराव ULIPs की मांग को कम कर सकते हैं और ट्रेडिशनल प्रोडक्ट्स की खरीद को टाल सकते हैं, जो नज़दीकी भविष्य में चुनौतियां पैदा करेंगे। यील्ड (ब्याज दर) बढ़ने की स्थिति भी खरीद निर्णयों को प्रभावित कर सकती है, जिससे और अधिक अनिश्चितता पैदा होगी।
