यह सरकारी पहल भारत के समुद्री व्यापार की Resilience को बढ़ाने और विदेशी बीमा कंपनियों पर निर्भरता कम करने के लिए है। दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच, यह कदम भारत के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस BMIP की खास बात यह है कि यह प्रति नुकसान (Per Loss) $1.5 अरब तक का कवर प्रदान करेगा, जिसे $1.4 अरब की सरकारी गारंटी का समर्थन प्राप्त है। General Insurance Corporation of India (GIC Re), जो भारत की एकमात्र डोमेस्टिक रीइंश्योरर है, इस पूल का प्रबंधन करेगी। GIC Re ने खुद भी इस पूल की शुरुआती अंडरराइटिंग क्षमता में ₹400 करोड़ का योगदान दिया है। यह पूल मुख्य रूप से समुद्री बीमा के Cargo (War), Hull & Machinery (War) और Protection & Indemnity (P&I) जैसे युद्ध से जुड़े महत्वपूर्ण जोखिमों को कवर करेगा।
यह लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब लाल सागर (Red Sea) और मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक युद्ध-जोखिम बीमा (War-Risk Insurance) की लागत पहले ही बढ़ रही है। भारत का लगभग 95% व्यापार मूल्य के हिसाब से समुद्र मार्ग से होता है, ऐसे में यह घरेलू बीमा क्षमता निर्बाध व्यापार को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह पहल भारत की घरेलू बीमा क्षमताओं को बढ़ावा देने और विदेशी बाजारों पर निर्भरता कम करने की एक रणनीतिक चाल है। दुनिया भर में 16वें स्थान पर काबिज GIC Re, इस प्रयास का नेतृत्व कर रही है। हालांकि GIC Re का भारतीय रीइंश्योरेंस बाजार में 60% की मजबूत हिस्सेदारी है, लेकिन उसे अक्सर विदेशी रीइंश्योरर से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
वैश्विक रीइंश्योरेंस बाजार में चुनौतियां बनी हुई हैं। लगातार बढ़ते नुकसान और भू-राजनीतिक घटनाओं ने बाजार की स्थितियों को और कड़ा कर दिया है। BMIP की $1.5 अरब की क्षमता बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्षों की बढ़ती आवृत्ति और गंभीरता से प्रभावित हो सकती है, खासकर फारस की खाड़ी (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर। विदेशी रीइंश्योरर अपनी लचीली शर्तों और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण GIC Re की रणनीति पर दबाव बना सकते हैं। युद्ध जैसे अप्रत्याशित जोखिमों का सटीक मूल्य निर्धारण सभी वैश्विक रीइंश्योरर के लिए एक बड़ी चुनौती है।
यह BMIP शुरुआती 10 साल के लिए स्थापित किया गया है, जिसे आगे 5 साल तक बढ़ाने के विकल्प के साथ। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बीमा क्षमता को गहरा करना और भारत के बढ़ते समुद्री व्यापार की मात्रा का समर्थन करना है, जो GIC Re की घरेलू विकास और पोर्टफोलियो अनुकूलन पर केंद्रित रणनीतिक फोकस के अनुरूप है।
