शिकायतों का अंबार क्यों?
फाइनेंशियल ईयर 2024-25 (FY25) के दौरान, बीमा कंपनियों के पास कुल 2,57,790 शिकायतें दर्ज हुईं। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20% की भारी वृद्धि को दर्शाता है। इनमें सबसे ज्यादा उछाल जनरल इंश्योरेंस सेगमेंट में देखा गया, जहां शिकायतों की संख्या 45% तक बढ़ गई। IRDAI के 'Bima Bharosa' पोर्टल पर दर्ज ये आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि बीमा कंपनियों के कामकाज और ग्राहकों की उम्मीदों के बीच एक बड़ी खाई पैदा हो गई है।
क्लेम सेटलमेंट की सबसे बड़ी दिक्कत
हेल्थ और जनरल इंश्योरेंस सेगमेंट में क्लेम सेटलमेंट में देरी और विवाद ग्राहकों की असंतुष्टि का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं। ये मुद्दे कुल शिकायतों का 69% हिस्सा हैं। अकेले हेल्थ इंश्योरेंस में FY25 में शिकायतों में 41% की बढ़ोतरी हुई और यह 1,37,361 तक पहुंच गईं। इसका मुख्य कारण क्लेम सेटलमेंट से जुड़े विवाद हैं। यह दर्शाता है कि बीमा कंपनियां अभी भी पॉलिसी की स्पष्टता और सर्विस स्टैंडर्ड्स को बनाए रखने में संघर्ष कर रही हैं।
लाइफ इंश्योरेंस में मिस-सेलिंग का बढ़ता ग्राफ
लाइफ इंश्योरेंस की बात करें तो, कुल शिकायतों की संख्या तो लगभग स्थिर रही, लेकिन शिकायतों की प्रकृति बदल गई। अनैतिक व्यावसायिक प्रथाओं, खासकर मिस-सेलिंग (गलत उत्पाद बेचना) से जुड़ी शिकायतें 14% बढ़कर 26,667 हो गईं। ये अब लाइफ इंश्योरेंस की कुल शिकायतों का 22% से अधिक हैं। यह ट्रेंड सेल्स चैनलों में मौजूद समस्याओं की ओर इशारा करता है, जहां ग्राहकों की जरूरत के बजाय आक्रामक बिक्री तकनीकों को बढ़ावा मिल रहा है। IRDAI ने मिस-सेलिंग को एक गंभीर चिंता का विषय बताया है।
डिस्प्यूट रेजोल्यूशन सिस्टम पर भारी बोझ
शिकायतों की इस बढ़ती संख्या ने भारत के कंज्यूमर डिस्प्यूट रेजोल्यूशन सिस्टम पर भारी दबाव डाल दिया है। 2020 से 2024 के बीच, कंज्यूमर केस बैकलॉग 21% बढ़कर 5.15 लाख से अधिक हो गए हैं। इस समस्या को और बढ़ाने वाली बात यह है कि स्टेट और डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन में हर पांच में से एक पद खाली है, जिससे न्याय मिलने की प्रक्रिया धीमी हो गई है।
भरोसा बनाए रखने की चुनौती
इन सब दिक्कतों के बावजूद, भारतीय बीमा क्षेत्र प्रीमियम ग्रोथ और रेगुलेटरी सुधारों के दम पर आगे बढ़ रहा है। हालांकि, लगातार बढ़ते क्लेम विवाद और मिस-सेलिंग की घटनाएं ये संकेत दे रही हैं कि मौजूदा बिजनेस मॉडल, खासकर ऊंचे डिस्ट्रीब्यूशन खर्चों के कारण, ग्राहक संतुष्टि से समझौता कर रहे हैं। इन समस्याओं को हल करने और ग्राहकों का भरोसा फिर से जीतने के लिए बीमा कंपनियों को अपनी ग्राहक सेवा, क्लेम हैंडलिंग और बिक्री प्रथाओं में बड़े सुधार करने होंगे।
