लाइफस्टाइल बीमारियों का बढ़ता बोझ
भारत में कैंसर, हार्ट डिजीज और डायबिटीज जैसी लाइफस्टाइल बीमारियां मौतों का सबसे बड़ा कारण बन गई हैं। ये सभी तरह की मृत्यु के 63% मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। खराब खान-पान, तनाव और आनुवंशिकी जैसे कारकों से उत्पन्न होने वाली ये बीमारियां न केवल राष्ट्रीय उत्पादकता बल्कि आर्थिक विकास को भी प्रभावित कर रही हैं।
हेल्थ खर्चों का बढ़ता बोझ
सरकारी प्रयासों और बाजार में प्रतिस्पर्धा के बावजूद, स्वास्थ्य पर होने वाला 'पॉकेट से खर्च' (out-of-pocket expenditure) अभी भी काफी ज्यादा है। 2021-22 में, यह कुल स्वास्थ्य खर्च का लगभग 40% रहा। इसका मतलब है कि अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी के समय बीमा या कम बीमा वाले कई लोग गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करते हैं।
प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की ओर बढ़ता रुख
प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का मतलब है कि बीमारियों को शुरू होने से पहले ही रोका जाए या उन्हें जल्दी पकड़ा जाए। नियमित स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच से क्रॉनिक (पुरानी) बीमारियों के विकसित होने की संभावना कम हो जाती है और भविष्य में इलाज का खर्च भी घटता है। अध्ययनों से पता चलता है कि नियमित चेक-अप, हाई-रिस्क वाले लोगों में मृत्यु के जोखिम को लगभग 45% तक कम कर सकते हैं। इसी को देखते हुए, हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां अब अपने कॉम्प्रिहेंसिव (व्यापक) प्लान्स में प्रिवेंटिव केयर बेनिफिट्स को एक किफायती अतिरिक्त सुविधा के तौर पर शामिल कर रही हैं।
नए इंश्योरेंस बेनिफिट्स में प्रिवेंटिव केयर
आजकल के हेल्थ इंश्योरेंस प्लान्स में टेली-कंसल्टेशन (दूर से मेडिकल सलाह) और ओपीडी (OPD) विज़िट्स का कवर शामिल है। कुछ प्लान्स में तो इंश्योरर के नेटवर्क के बाहर भी अप्रूवल के बाद इन सेवाओं का लाभ उठाया जा सकता है। ओपीडी बेनिफिट्स का उपयोग अक्सर साल में कई बार, कभी-कभी पॉलिसी के वार्षिक प्रीमियम से दोगुना तक किया जा सकता है। हालांकि, पॉलिसी के पहले साल में नई बीमारियों के लिए आमतौर पर 30 दिन का वेटिंग पीरियड लागू होता है। खास बात यह है कि इन ओपीडी या प्रिवेंटिव बेनिफिट्स का इस्तेमाल करने से आपके नो-क्लाइम बोनस (NCB) पर असर नहीं पड़ता, जब तक कि प्रिवेंटिव चेक-अप के कारण किसी गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती न होना पड़े।
पॉलिसीहोल्डर्स के लिए सलाह
पॉलिसीहोल्डर्स को अपने प्रिवेंटिव हेल्थ बेनिफिट्स की विशिष्ट शर्तों को ध्यान से जांचना चाहिए। इसमें यह जानना शामिल है कि इनका कितनी बार उपयोग किया जा सकता है, लिमिट क्या है, कोई वेटिंग पीरियड है या नहीं, और टेस्ट नेटवर्क सेंटर्स पर ही कराने होंगे या नहीं। इन सब-लिमिट्स को समझना प्लानिंग के लिए महत्वपूर्ण है। यदि आपके पास अभी तक कवरेज नहीं है, तो पॉलिसी रिन्यू करते समय प्रिवेंटिव ऐड-ऑन पर विचार करना लंबे समय में काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड के चीफ टेक्निकल ऑफिसर (Commercial) अमरनाथ सक्सेना ने पॉलिसीहोल्डर्स की सक्रियता के महत्व पर जोर देते हुए कहा, "प्रिवेंटिव हेल्थ कवरेज का सबसे अच्छा उपयोग तब होता है जब इसे नियमित रूप से, प्रतिक्रियात्मक तरीके से नहीं, बल्कि सक्रिय होकर किया जाए। वार्षिक टेस्ट शेड्यूल करना, असामान्य रिपोर्ट पर फॉलो-अप लेना और अपनी पॉलिसी को एक्टिव रखना यह सुनिश्चित करता है कि आपको पूरा लाभ मिले।" लाइफस्टाइल बीमारियों के बढ़ते माहौल में इन प्रिवेंटिव बेनिफिट्स का समझदारी और लगातार उपयोग करने से मेडिकल और वित्तीय दोनों तरह के बड़े फायदे मिल सकते हैं।
