कैपेसिटी सरज ने छेड़ी प्राइस वॉर
प्रीमियम्स में यह भारी गिरावट भारत के इंश्योरेंस मार्केट में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जो कि रीइंश्योरेंस कैपेसिटी के तेजी से विस्तार से प्रेरित है। जहां अभी पॉलिसीधारकों को सस्ते दाम मिल रहे हैं, वहीं इंश्योरर कंपनियों के प्रॉफिट (Profit) पर असर पड़ रहा है और लॉन्ग-टर्म मार्केट स्टेबिलिटी खतरे में है।
ग्लोबल रीइंश्योरर्स की भारतीय मार्केट में बाढ़
प्रॉपर्टी, मरीन, लायबिलिटी और एम्प्लॉई बेनिफिट्स जैसे इंश्योरेंस रिन्यूअल रेट्स में 80% तक की गिरावट देखी गई है। यह जबरदस्त प्राइस कॉम्पिटिशन अंडरराइटिंग कैपेसिटी की ओवरसप्लाई के कारण है। इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव्स का कहना है कि इसका मुख्य कारण GIFT City, भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज हब, का महत्वपूर्ण विस्तार है। दो दर्जन से ज्यादा ग्लोबल रीइंश्योरर्स GIFT City से ऑपरेट करने के लिए मंजूरी ले रहे हैं या वहां अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, जिसका फायदा उन्हें टैक्स इंसेंटिव्स और आसान रेगुलेशन से मिल रहा है। इससे भारतीय मार्केट के लिए उपलब्ध कैपिटल (Capital) में भारी इजाफा हुआ है, जिससे कॉम्पिटिशन पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।
सभी सेक्टर्स पर गिरी कीमतें, विदेशी फर्मों का बढ़ा दबदबा
पिछली बार के मार्केट साइकल्स (Market Cycles) के विपरीत, जो आमतौर पर कुछ खास बिजनेस लाइन्स को ही प्रभावित करते थे, यह गिरावट सभी सेगमेंट्स में देखी जा रही है। Prudent Insurance Brokers के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर Pavanjit Singh Dhingra ने इसे अपने 25 साल के करियर में अभूतपूर्व बताया है। यह इंटेंस कॉम्पिटिशन और कैपेसिटी सरज (Surge) ऐसे समय में हो रहा है जब भारत का इंश्योरेंस पेनिट्रेशन (Penetration) अभी भी काफी कम है – FY24 में GDP का लगभग 3.7%, जबकि OECD एवरेज 2024 में 6.2% था। हालांकि, यह दिखाता है कि भारतीय इंश्योरेंस मार्केट में लॉन्ग-टर्म ग्रोथ (Growth) की काफी संभावना है, लेकिन जरूरत से ज्यादा कैपेसिटी का होना और डिमांड का कम होना कीमतों को तेजी से नीचे ला रहा है। प्रॉपर्टी इंश्योरेंस रेट्स में 15-25% की गिरावट आई, वहीं फाइनेंशियल लाइन्स में Q4 2025 में 25% तक की कमी देखी गई। विदेशी रीइंश्योरर्स का भारतीय मार्केट में शेयर FY24 में बढ़कर 49% हो गया है, और 2025 में इसके 50% से ऊपर जाने का अनुमान है, जिससे डोमेस्टिक रीइंश्योरर GIC Re का दबदबा काफी कम हो गया है।
चेतावनी: सस्टेनेबल न प्राइसिंग से इंश्योरर प्रॉफिट को खतरा
कॉर्पोरेट बायर्स (Buyers) जहां कम लागत पर खुश हैं, वहीं इन दामों की सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) ज्यादा समय तक रहने की उम्मीद नहीं है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि बहुत कम प्रीमियम, जो वास्तविक रिस्क को कवर करने के लिए पर्याप्त न हों, क्लेम्स (Claims) आने पर समस्याएं खड़ी कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, FY22-23 में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रेशियो 90% से ऊपर था। ओवरऑल मार्केट ग्रोथ के बावजूद, बड़े जनरल इंश्योरर्स ने FY2025 में अंडरराइटिंग लॉसेस (Underwriting Losses) रिपोर्ट किए। इसका मतलब है कि रेवेन्यू (Revenue) बढ़ने के बावजूद, प्रॉफिट पर भारी दबाव है। IRDAI (Insurance Regulatory and Development Authority of India) ने ब्रोकर्स (Brokers) को वैल्यूएशन बढ़ाने के लिए 'शार्प प्रैक्टिसेज' (Sharp Practices) से बचने की चेतावनी दी है, जो रेगुलेटरी (Regulatory) तौर पर इस बात का संकेत है कि मार्केट शायद सस्टेनेबल न हो। ऐतिहासिक रूप से, अत्यधिक कैपेसिटी और आक्रामक प्राइसिंग वाले पीरियड्स अक्सर शार्प मार्केट करेक्शंस (Corrections) की ओर ले जाते हैं, और मौजूदा व्यापक प्राइस ड्रॉप्स बताते हैं कि यह साइकल (Cycle) खास तौर पर गंभीर हो सकता है।
मौजूदा उथल-पुथल के बावजूद लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की उम्मीद
मौजूदा प्राइसिंग अराजकता (Chaos) के बावजूद, भारत के इंश्योरेंस मार्केट के लिए लॉन्ग-टर्म पूर्वानुमान (Forecasts) पॉजिटिव बने हुए हैं। Swiss Re का अनुमान है कि 2026 से 2030 के बीच एनुअल प्रीमियम ग्रोथ 6.9% रहेगी, जो कि अधिकांश बड़े मार्केट्स से तेज है। Moody's का अनुमान है कि लगातार प्रीमियम ग्रोथ मीडियम-टर्म प्रॉफिट को सपोर्ट करेगी, हालांकि तेजी से विस्तार और रेगुलेटरी बदलावों के कारण कैपिटल एडिक्वेसी (Capital Adequacy) पर संभावित दबाव की बात भी कही गई है। हालांकि, इस पॉजिटिव भविष्य को हासिल करने के लिए समझदार प्राइसिंग और सावधानीपूर्वक अंडरराइटिंग पर लौटना जरूरी है। Insurance Brokers Association of India जैसे इंडस्ट्री ग्रुप्स इस बात पर जोर देते हैं कि प्राइसिंग साउंड रिस्क असेसमेंट (Risk Assessment) पर आधारित होनी चाहिए, जो कि अब अतिरिक्त कैपेसिटी से होने वाली इंटेंस कॉम्पिटिशन से चुनौती पा रही है।