सेक्टर में तूफानी तेजी की उम्मीद
GlobalData की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनरल इंश्योरेंस सेक्टर 2026 से 10% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से रफ्तार पकड़ेगा। इस ग्रोथ के साथ, ग्रॉस रिटन प्रीमियम 2026 में अनुमानित ₹3.6 लाख करोड़ से बढ़कर 2030 तक ₹5.4 लाख करोड़ हो जाने की उम्मीद है। 2025 में सेक्टर ने 8.5% की ग्रोथ देखी थी, जो 2026 में थोड़ी कम होकर 5.1% रह सकती है। ऐसा अकाउंटिंग में बदलाव और GST के बाद सामान्य होने की वजह से होगा। हालांकि, 2026 के बाद इकोनॉमी की ग्रोथ और इंश्योरेंस पेनिट्रेशन बढ़ने से यह फिर से तेज हो जाएगी।
Health और Motor इंश्योरेंस सबसे आगे
हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस मिलकर जनरल इंश्योरेंस प्रीमियम का 72.6% हिस्सा रखते हैं (2025 में)। पर्सनल एक्सीडेंट और हेल्थ (PA&H) सेगमेंट सबसे बड़ा है, जिसका प्रीमियम में हिस्सा 2025 में 40.9% था (2021 में 35.7% था)। इस सेगमेंट में 2026 में 8.8% की ग्रोथ का अनुमान है। सितंबर 2025 से रिटेल हेल्थ पॉलिसी पर GST हटने जैसे रेगुलेटरी सपोर्ट से इसकी डिमांड बढ़ी है। इंश्योरेंस कंपनियां आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) और वेलनेस कवरेज जैसी सुविधाएं जोड़कर ग्राहकों के खर्च को कम करने की कोशिश कर रही हैं।
31.7% शेयर वाला मोटर इंश्योरेंस सेगमेंट भी बदल रहा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और उनके एडवांस्ड पार्ट्स की बढ़ती वैल्यू के कारण EV-स्पेसिफिक इंश्योरेंस में ग्रोथ देखी जा रही है। यूसेज-बेस्ड इंश्योरेंस और टेलीमैटिक्स-आधारित अंडरराइटिंग जैसे नए तरीके भी अपनाए जा रहे हैं, जिससे पर्सनलाइज्ड कवरेज की ओर रुझान बढ़ रहा है।
पॉलिसी रिफॉर्म्स से मिलेगा बूस्ट
2026 से 2030 के बीच, पॉलिसीहोल्डर प्रोटेक्शन में सुधार, क्लेम सेटलमेंट में तेजी और कैटास्ट्रोफी रिस्क कवरेज बढ़ने से सेक्टर की ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा। 100% FDI, IRDAI की बढ़ी हुई ताकत और कंपोजिट लाइसेंसिंग जैसे रेगुलेटरी रिफॉर्म्स कैपिटल अट्रैक्ट करने, नए प्रोडक्ट लाने और खासकर टियर II और टियर III शहरों व MSMEs के बीच इंश्योरेंस पेनिट्रेशन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर से प्रॉपर्टी इंश्योरेंस को फायदा
प्रॉपर्टी इंश्योरेंस सेगमेंट, जिसका प्रीमियम में हिस्सा 20.2% है (2025 में), इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पब्लिक इन्वेस्टमेंट से फायदा उठाएगा। 2026–27 के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर पर $128.6 बिलियन खर्च होने का अनुमान है, और छोटे शहरों में भी डेवलपमेंट बढ़ने से प्रॉपर्टी इंश्योरेंस की डिमांड बढ़ेगी।
प्रमुख जोखिम और चुनौतियां
अच्छी ग्रोथ की उम्मीदों के बावजूद, कुछ चुनौतियां भी हैं। सर्विस क्वालिटी के मुद्दे और ग्राहकों की बढ़ती शिकायतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। जियोपॉलिटिकल टेंशन और क्लाइमेट-से जुड़े नुकसान जैसे बाहरी फैक्टर मुनाफाखोरों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। कैटास्ट्रोफी एक्सपोजर को री-प्राइस करना और रिपेयर कॉस्ट का बढ़ना मोटर इंश्योरेंस प्रीमियम पर दबाव डाल रहा है। पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल अस्थिरता मरीन, एविएशन और ट्रांजिट (MAT) इंश्योरेंस को भी प्रभावित कर रही है।
