बीमा रेगुलेटर IRDAI ने शेयर ट्रांसफर और ESOP को लेकर सख्त नियम जारी किए हैं। अब कंपनियों को स्टेक्स में बदलाव के लिए पहले मंजूरी लेनी होगी, वहीं प्रोसेस फीस में **80%** की बड़ी कटौती कर इसे **₹10 लाख** कर दिया गया है।
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने 2 नवंबर, 2026 को एक मास्टर सर्कुलर जारी किया है, जो बीमा कंपनियों के कामकाज में बड़ी पारदर्शिता लाएगा। इस नए निर्देश का सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इंश्योरेंस कंपनियों के मालिक और प्रमोटर्स के शेयर वितरण में पूरी स्पष्टता बनी रहे।
ओनरशिप थ्रेशोल्ड में बड़े बदलाव
नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई निवेशक अपनी हिस्सेदारी को 5%, 10%, 25%, 50% और 75% के दायरे से ऊपर ले जाता है, तो उसे पहले रेगुलेटर से अनुमति लेनी होगी। यह नियम न केवल नए निवेशकों के लिए, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों पर भी लागू होगा। इसका मकसद यह है कि रेगुलेटर के पास कंपनी की पूंजी के हर बड़े हिस्सेदार की सही जानकारी रहे।
ESOP पर कड़ी निगरानी
रेगुलेटर ने साफ किया है कि सीनियर एग्जीक्यूटिव्स और डायरेक्टर्स अब ESOPs के जरिए ओनरशिप लिमिट को बायपास नहीं कर पाएंगे। अब इंश्योरेंस कंपनियों को यह ट्रैक करना होगा कि कोई भी व्यक्ति या ग्रुप तय सीमा से ज्यादा हिस्सेदारी तो नहीं रख रहा है। इसके लिए कंपनियों को अपने इंटरनल सिस्टम को और मजबूत बनाना होगा।
लिस्टेड कंपनियों की चुनौती
शेयर बाजार में लिस्टेड इंश्योरेंस कंपनियों को अब स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरीज के साथ समन्वय कर रियल-टाइम डेटा मेंटेन करना होगा। इससे कंपनियों पर एडमिनिस्ट्रेटिव बोझ जरूर बढ़ेगा, लेकिन इससे शेयरहोल्डिंग पैटर्न में पारदर्शिता आएगी।
फीस में बड़ी राहत
सख्त नियमों के बीच रेगुलेटर ने कंपनियों को राहत भी दी है। शेयर ट्रांसफर अप्रूवल की प्रोसेस फीस को ₹50 लाख से घटाकर ₹10 लाख कर दिया गया है, यानी इसमें 80% की भारी कमी की गई है। अब इंश्योरेंस कंपनियों को अपनी इंटरनल पॉलिसीज और मैनेजमेंट कंपनसेशन को इन नए नियमों के अनुरूप अपडेट करना होगा।
