इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने ऑनलाइन इंश्योरेंस पोर्टल्स पर होने वाली धोखाधड़ी और गलत प्रैक्टिसेज पर लगाम लगाने के लिए एक नया कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें 'Dark Patterns' जैसे भ्रामक तरीकों पर पूरी तरह बैन लगाने की तैयारी है।
बीमा क्षेत्र के रेगुलेटर IRDAI ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे 'Dark Patterns' को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ये वे डिजिटल हथकंडे हैं जिनका इस्तेमाल ग्राहकों को उनकी मर्जी के खिलाफ डेटा शेयर करने या पॉलिसी खरीदने के लिए मजबूर करने के लिए किया जाता है।
क्या हैं ये नए नियम?
IRDAI ने अपने हालिया कंसल्टेशन पेपर, 'Recalibrating Economics of Insurance Distribution' में उन तौर-तरीकों की पहचान की है जो पारदर्शिता को नुकसान पहुंचा रहे हैं:
- Forced Actions: बिना व्यक्तिगत जानकारी (Personal Data) दिए ग्राहक को इंश्योरेंस कोट देखने तक नहीं दिया जाता।
- Drip Pricing: पॉलिसी का अंतिम दाम आवेदन प्रक्रिया के बिल्कुल अंत में पता चलता है, जिससे ग्राहक को गुमराह किया जाता है।
- Privacy Zuckering: जरूरत से ज्यादा डेटा इकट्ठा करना।
निवेशकों पर असर
रेगुलेटर का मकसद 'Bima Sugam' जैसे पोर्टल्स को और अधिक पारदर्शी बनाना है। हालांकि, उन बड़ी डिजिटल इंश्योरेंस कंपनियों और एग्रीगेटर्स के लिए यह चुनौती बन सकता है जो अपनी सेल्स बढ़ाने के लिए इन्हीं आक्रामक डिजिटल तकनीकों पर निर्भर हैं। यदि ये नियम लागू होते हैं, तो कंपनियों को अपने यूजर इंटरफेस में बदलाव करना होगा, जिससे उनके कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट (CAC) और कन्वर्जन रेट पर सीधा असर पड़ सकता है।
इसी तरह की गाइडलाइंस पहले Central Consumer Protection Authority (CCPA) द्वारा ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भी लाई जा चुकी हैं। फिलहाल, IRDAI ने इस प्रस्ताव पर 25 अक्टूबर तक आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से राय मांगी है।
