IRDAI ने हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब कंपनियों को **1 घंटे** के भीतर कैशलेस क्लेम और **3 घंटे** में डिस्चार्ज अप्रूवल देना अनिवार्य होगा।
अब क्लेम के लिए नहीं करना होगा घंटों इंतज़ार
इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने पॉलिसीधारकों की सुविधा के लिए सख्त गाइडलाइन्स जारी की हैं। नई पॉलिसी के तहत, अब बीमा कंपनियों को प्री-ऑथोराइजेशन रिक्वेस्ट मिलने के 60 मिनट के भीतर जवाब देना होगा। साथ ही, अस्पताल द्वारा जरूरी दस्तावेज जमा करने के 3 घंटे के अंदर डिस्चार्ज की मंजूरी देनी होगी। यह कदम अस्पतालों में बिलिंग काउंटर पर होने वाली देरी को खत्म करने के लिए उठाया गया है।
रीइम्बर्समेंट क्लेम और कागजी कार्रवाई
रीइम्बर्समेंट (Reimbursement) के मामलों में भी रेगुलेटर ने सख्ती दिखाई है। अब बीमा कंपनियों को सभी दस्तावेज मिलने के 30 दिन के भीतर क्लेम को सेटल या रिजेक्ट करना होगा। यदि किसी मामले में जांच की जरूरत है, तो इसे अधिकतम 45 दिनों में पूरा करना होगा। साथ ही, कंपनियों को अब एक ही बार में सभी जरूरी कागजातों की लिस्ट मांगनी होगी, ताकि पॉलिसीधारकों को बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें।
कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव
इन कड़े नियमों के पालन के लिए कंपनियों को अपनी टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश करना होगा। Star Health, ICICI Lombard और HDFC Ergo जैसी लिस्टेड कंपनियों को अपनी ऑपरेशनल क्षमता बढ़ानी होगी। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि इन सख्त डेडलाइन्स के बीच कंपनियां अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं।
ग्राहकों की सुरक्षा और पारदर्शिता
रेगुलेटर ने रिजेक्शन प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाया है। अब कंपनियों को क्लेम रिजेक्ट करने पर विस्तृत लिखित कारण देना होगा। इसके अलावा, 60 महीने का मोरेटोरियम पीरियड (Moratorium period) लागू किया गया है, जिसके बाद 5 साल से चल रही पॉलिसी पर कंपनियां आसानी से नॉन-डिस्क्लोजर का हवाला देकर क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकेंगी, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
