IRDAI ने इंश्योरेंस कमीशन पर लगाम लगाने का प्रस्ताव रखा है, जो कुछ स्कीमों में **93%** तक पहुंच गया था। इस पारदर्शिता के फैसले के बाद सितंबर 2026 में इंश्योरेंस-लिंक्ड शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
कमीशन स्ट्रक्चर पर रेगुलेटर की सख्ती
Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के इकोनॉमिक्स को बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 23 सितंबर 2026 को जारी कंसल्टेशन पेपर में रेगुलेटर ने इंडस्ट्री में चल रही खामियों और अस्पष्ट कमीशन ढांचे पर सवाल उठाए हैं।
चेयरमैन Ajay Seth के नेतृत्व में, रेगुलेटर ने पाया कि इंश्योरेंस बेचने वाले डिस्ट्रीब्यूटर्स का मुनाफा प्रीमियम कलेक्शन की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ा है। कुछ ग्रुप हेल्थ स्कीमों में कमीशन 93% तक और ऑटोमोटिव सेक्टर में 38% तक पहुंच चुका है। IRDAI का मानना है कि यह स्ट्रक्चर ग्राहकों के हितों के बजाय अधिक कमीशन वाले प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देता है।
मार्केट पर असर और निवेशकों की घबराहट
इस खबर के बाद शेयर बाजार में हड़कंप मच गया। 24 सितंबर 2026 को इंश्योरेंस और इससे जुड़े स्टॉक्स में भारी गिरावट देखी गई। विशेष रूप से PB Fintech के शेयर में एक ही सत्र में लगभग 36% की भारी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक डिजिटल ब्रोकरों के भविष्य के मुनाफे को लेकर डरे हुए हैं।
बिजनेस मॉडल पर संकट
IRDAI के प्रस्तावों में कमीशन कैपिंग, अनिवार्य सूटेबिलिटी असेसमेंट और गलत तरीके से पॉलिसी बेचने पर 'कमीशन क्लॉबैक' शामिल है। यदि ये नियम लागू होते हैं, तो बैंक, वेब एग्रीगेटर और एजेंट्स के बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव आएगा। जो कंपनियां हाई-मार्जिन कमीशन पर टिकी हैं, उनके प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा दबाव पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
रेगुलेटर ने इस पेपर पर 25 अक्टूबर 2026 तक पब्लिक कमेंट्स मांगे हैं। फिलहाल ये प्रस्ताव चर्चा के दौर में हैं, लेकिन 2027 की शुरुआत तक इनके लागू होने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि इंडस्ट्री इन नियमों को लेकर क्या फीडबैक देती है और फाइनल रेगुलेशन किस स्वरूप में सामने आता है।
