IRDAI ने इंश्योरेंस सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए एक नया 'Public Insurance Registry' (PIR) प्रपोजल जारी किया है। इसका उद्देश्य डेटा को सेंट्रलाइज करना और धोखाधड़ी पर लगाम लगाना है। नियामक ने इस पर **30 सितंबर, 2026** तक जनता से सुझाव मांगे हैं।
बीमा क्षेत्र को डिजिटल बनाने की दिशा में भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। 'Public Insurance Registry' (PIR) का प्रस्ताव 'Digital Public Infrastructure' (DPI) के तहत लाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य सभी इंश्योरेंस कंपनियों, री-इंश्योरेंस कंपनियों और बिचौलियों के डेटा को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ना है। यह पहल 'सबका बीमा सबकी रक्षा (संशोधन) अधिनियम, 2025' के उद्देश्यों के साथ मेल खाती है।
डेटा मैनेजमेंट में नया बदलाव
PIR एक 'फेडरेटेड आर्किटेक्चर' पर काम करेगा। इसका मतलब है कि डेटा कंपनियों के पास ही सुरक्षित रहेगा, लेकिन इसे सुरक्षित रूप से एक्सचेंज किया जा सकेगा। इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। बेहतर डेटा एक्सेस से अंडरराइटिंग मॉडल को और अधिक सटीक बनाने में मदद मिलेगी, जिससे रिस्क असेसमेंट और प्राइसिंग पहले से बेहतर हो सकेगी।
निवेशकों और कंज्यूमर्स को फायदा
निवेशकों के नजरिए से देखें तो, बेहतर डेटा शेयरिंग से कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी। इससे कंपनियों का फंसा हुआ कैपिटल रिलीज हो सकता है। वहीं, ग्राहकों के लिए एक डिजिटल डैशबोर्ड की सुविधा होगी, जहां वे अपनी सभी पॉलिसी एक ही जगह देख सकेंगे, क्लेम हिस्ट्री ट्रैक कर सकेंगे और अनक्लेम्ड बेनिफिट्स का पता लगा सकेंगे।
बिचौलियों पर कसेगा शिकंजा
इस रजिस्ट्री के जरिए इंटरमीडियरीज (बिचौलियों) की परफॉर्मेंस पर भी नजर रखी जाएगी। उनके द्वारा किए गए गलत सेल्स (mis-selling) और शिकायतों के निपटारे का पूरा ट्रैक रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स पर कड़ा नियंत्रण रखेंगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
चुनौतियां और भविष्य
इतने बड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए डेटा सिक्योरिटी और टेक्निकल इंटरऑपरेबिलिटी सबसे बड़ी चुनौती होगी। इंश्योरेंस कंपनियों को अपने पुराने सिस्टम (legacy systems) को नए फ्रेमवर्क के साथ इंटीग्रेट करने के लिए शुरुआती निवेश करना पड़ सकता है। फिलहाल, IRDAI ने इस प्रपोजल पर 30 सितंबर, 2026 तक फीडबैक मांगा है, जिसके बाद ही इसके कार्यान्वयन का स्पष्ट रोडमैप सामने आएगा।
