इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने कमीशन और ऑपरेटिंग खर्चों पर नई सीमाएं तय करने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम से पॉलिसीधारकों पर बोझ कम होगा, लेकिन इंश्योरेंस और डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के शेयरों में भारी उठापटक देखी जा रही है।
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने इंडस्ट्री के कॉस्ट स्ट्रक्चर की समीक्षा शुरू कर दी है। रेगुलेटर का लक्ष्य कमीशन और ऑपरेटिंग खर्चों को कम करना है ताकि आम आदमी को इंश्योरेंस सस्ता मिले। रेगुलेटर ने 'Recalibrating Economics of Insurance Distribution' नाम से एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है।\n\n### क्यों आया यह बदलाव?\n\nरेगुलेटर का मानना है कि इंश्योरेंस बिजनेस की ग्रोथ के मुकाबले डिस्ट्रिब्यूटर को मिलने वाला पेआउट बहुत तेजी से बढ़ा है। आंकड़े बताते हैं कि फाइनेंशियल ईयर 2023 से 2025 के बीच लाइफ इंश्योरेंस में कॉर्पोरेट एजेंटों का पेआउट 125% बढ़ा है, जबकि प्रीमियम ग्रोथ केवल 28% रही।\n\n### क्या हैं नए नियम?\n\nIRDAI अब 'Expense of Management' (EoM) लिमिट को कम करने की योजना बना रही है:\n- लाइफ इंश्योरेंस के लिए: 2 साल में इसे 15% और 5 साल में 12.5% तक लाया जाएगा।\n- जनरल इंश्योरेंस के लिए: इसे 2 साल में 25% और 5 साल में 20% तक घटाने का प्रस्ताव है।\n\n### मार्केट पर असर\n\nसितंबर 2026 के अंत में इस घोषणा के बाद बाजार में खलबली मच गई। PB Fintech और HDFC Life जैसे शेयरों में बड़ी हलचल देखी गई। निवेशकों को डर है कि हाई-कॉस्ट मॉडल वाली कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर बुरा असर पड़ सकता है।\n\nफिलहाल, Insurance Brokers Association of India ने इस पर चिंता जताई है कि कमीशन में कटौती से सर्विस क्वालिटी और छोटे बाजारों में डिस्ट्रीब्यूशन पर असर पड़ सकता है। रेगुलेटर ने 25 अक्टूबर, 2026 तक जनता और स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगा है, जिसके बाद ही अंतिम फैसले पर मुहर लगेगी।
