IRDAI ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें इंश्योरेंस कंपनियों को अनिवार्य रूप से ग्राहकों से कॉन्टैक्ट डीटेल्स मांगने से रोकने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य वेबसाइटों पर पारदर्शिता लाना और आक्रामक लीड-जेनरेशन को खत्म करना है।
'डार्क पैटर्न' पर लगाम लगाने की तैयारी
इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI अब इंश्योरेंस कंपनियों की डिजिटल कार्यप्रणाली को बदलने की तैयारी में है। रेगुलेटर का फोकस 'डार्क पैटर्न' जैसी प्रथाओं को खत्म करने पर है, जहां वेबसाइटें प्रीमियम बताने या प्रोडक्ट की जानकारी देने के लिए ग्राहकों से नाम, फोन नंबर और ईमेल जैसी जानकारी अनिवार्य रूप से मांगती हैं। रेगुलेटर का मानना है कि यह ग्राहकों के लिए एक अनावश्यक बाधा है, जिसका इस्तेमाल कंपनियां केवल मार्केटिंग कॉल्स के लिए डेटाबेस तैयार करने में करती हैं।
डिजिटल इंश्योरेंस स्ट्रैटेजी पर क्या होगा असर?
यह प्रस्तावित बदलाव कंपनियों के वेब डिजाइन और कस्टमर एक्विजिशन (Customer Acquisition) मॉडल को पूरी तरह से बदल सकता है। अब तक, डिजिटल इंश्योरेंस बिजनेस का पूरा ढांचा वेबसाइट पर आने वाले विजिटर्स को लीड्स में बदलने पर टिका था। यदि यह नियम लागू होता है, तो कंपनियों को अपनी मार्केटिंग और फॉलो-अप प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने होंगे।
रेगुलेटर का जोर इस बात पर है कि ग्राहकों को पॉलिसी की जानकारी, क्लेम सेटलमेंट रेश्यो और शिकायत निवारण डेटा के बारे में बिना किसी शर्त के पूरी स्पष्टता मिले।
इंडस्ट्री के लिए अगला कदम
फिलहाल यह सिर्फ एक कंसल्टेशन पेपर है और इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक लेने के बाद ही अंतिम नियम तय होंगे। इंश्योरेंस एग्रीगेटर्स और कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती यह होगी कि वे बिना आक्रामक डेटा कलेक्शन के अपने सेल्स कन्वर्जन को कैसे बरकरार रखते हैं। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां अपनी डिजिटल मार्केटिंग रणनीति में कैसे ढलती हैं।
