IRDAI ने क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस पर मिलने वाले भारी कमीशन को कम करने का प्रस्ताव रखा है। इस नियम के बाद प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियां अब बैंकों पर अपनी निर्भरता कम कर इन-हाउस सेल्स चैनल को मजबूत करने की तैयारी कर रही हैं।
इंश्योरेंस सेक्टर में एक बड़ा बदलाव आने की तैयारी है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने 'Recalibrating Economics of Insurance Distribution' नाम से एक ड्राफ्ट जारी किया है, जिसका मुख्य मकसद इंश्योरेंस की बिक्री में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना और पॉलिसीहोल्डर्स को सही वैल्यू दिलाना है।
कमीशन में भारी कटौती की तैयारी
फिलहाल, क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस में मिलने वाला कमीशन काफी ज्यादा होता है, जहां पहले साल का कमीशन 14% और रिन्यूअल पर 38% तक मिलता है। IRDAI के नए प्रस्ताव के मुताबिक, इसे घटाकर क्रमश: 2.5% और 1% करने की बात कही गई है। यह बदलाव कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर डाल सकता है।
कंपनियों की नई स्ट्रैटेजी
ICICI Prudential Life और HDFC Life जैसे दिग्गज अब अपने बिजनेस मॉडल की समीक्षा कर रहे हैं। अभी तक ये कंपनियां 'बैंकाश्योरेंस' (बैंकों के जरिए पॉलिसी बेचना) पर काफी निर्भर रही हैं, लेकिन कमीशन नियमों में बदलाव के कारण अब ये कंपनियां डिजिटल, डायरेक्ट और अपनी खुद की एजेंसी प्लेटफॉर्म्स पर दांव लगा रही हैं। इन-हाउस सेल्स चैनल बढ़ने से कंपनियों का अपने कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट पर कंट्रोल बढ़ेगा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बदलाव से शुरू में कंपनियों पर थोड़ा दबाव आ सकता है, क्योंकि इन-हाउस चैनल के लिए फिक्स्ड कॉस्ट ज्यादा होती है। हालांकि, लंबी अवधि में यह मॉडल कंपनियों को ज्यादा स्टेबल बना सकता है। ड्राफ्ट पर सुझाव भेजने की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर, 2026 है, जिसके बाद फाइनल गाइडलाइंस साफ हो जाएंगी कि कंपनियों का मार्जिन किस हद तक प्रभावित होगा।
