IRDAI ने हाल ही में इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें कमीशन पर कैप लगाने और खर्च की सीमा तय करने का प्रस्ताव है, जिससे इंश्योरेंस सेक्टर और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के मुनाफे पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।
क्या है IRDAI का नया प्लान?
इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने 23 सितंबर, 2026 को 'Recalibrating Economics of Insurance Distribution' नाम से एक पेपर जारी किया है। इसका मुख्य मकसद पारदर्शिता लाना और सेल वॉल्यूम के बजाय क्वालिटी सर्विस को बढ़ावा देना है। रेगुलेटर इसके लिए 'Public Insurance Registry' (PIR) बनाने की योजना पर काम कर रहा है, जिससे पॉलिसी रिन्यूअल और सेल पर नजर रखी जा सकेगी।
मुनाफे पर क्या होगा असर?
रेगुलेटर ने लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए 'Expense of Management' (EoM) को अगले 2 साल में 15% और 5 साल के भीतर 12.5% तक लाने का सुझाव दिया है। इस खबर के बाद 24 सितंबर, 2026 को बाजार में इंश्योरेंस कंपनियों और PB Fintech जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के शेयरों में जोरदार गिरावट देखी गई।
इंडस्ट्री का क्या है स्टैंड?
'Insurance Brokers Association of India' समेत कई संस्थाओं ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका मानना है कि कमीशन कैप होने से छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में इंश्योरेंस की पहुंच कम हो सकती है, क्योंकि वहां डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट ज्यादा होती है।
फिलहाल इस प्रस्ताव पर फीडबैक देने की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर, 2026 है। निवेशक अब फाइनल रेगुलेशन पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह कंपनियों के बिजनेस मॉडल और भविष्य के प्रॉफिट मार्जिन को पूरी तरह बदल सकता है।
