इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI (Indian Insurance Regulatory and Development Authority) इंश्योरेंस सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है। इसके तहत, अब हर इंश्योरेंस पॉलिसी की बिक्री सीधे उस सेल्स पर्सन के नाम से जोड़ी जाएगी जिसने उसे बेचा है।
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पब्लिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री: जवाबदेही की नई कड़ी
IRDAI एक नई 'पब्लिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री' बनाने की योजना बना रहा है। इसका मतलब है कि भविष्य में बेची जाने वाली हर इंश्योरेंस पॉलिसी सीधे उस व्यक्ति से जुड़ी होगी जिसने वह बिक्री की है। फिलहाल, कई बार बैंक या बड़े ब्रोकरेज फर्मों के माध्यम से बेची गई पॉलिसियों को इंटरमीडियरी के नाम पर दर्ज किया जाता है, जिससे ग्राहक और रेगुलेटर के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि असल में किस एजेंट ने यह पॉलिसी बेची थी।
इस नई व्यवस्था से रेगुलेटर इंश्योरेंस सेक्टर में हो रही 'मिस-सेलिंग' यानी ग्राहकों को उनकी जरूरत के हिसाब से गलत प्रोडक्ट बेचने की समस्या से निपटना चाहता है। IRDAI के चेयरमैन अजय सेठ ने बताया कि यह सिस्टम व्यक्तिगत सेल्सपर्सन के प्रदर्शन और उनके ट्रैक रिकॉर्ड को बेहतर ढंग से ट्रैक करने में मदद करेगा, खासकर तब जब वे एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जाते हैं। अब इंश्योरेंस कंपनियों को नए एजेंटों की हायरिंग के दौरान उनकी पृष्ठभूमि की अधिक गहन जांच करनी होगी, ठीक वैसे ही जैसे दूसरे रेगुलेटेड फाइनेंशियल सेक्टर में होता है।
इंसेंटिव मॉडल में बदलाव की तैयारी
सिर्फ ट्रैकिंग ही नहीं, IRDAI इंश्योरेंस कंपनियों को अपने सेल्स टीमों के पेमेंट स्ट्रक्चर पर भी पुनर्विचार करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। मकसद यह है कि सेल्स परफॉर्मेंस को सिर्फ बेची गई पॉलिसियों की संख्या के आधार पर न आंका जाए। इसके बजाय, IRDAI चाहता है कि कंपनियां ग्राहकों को दी जाने वाली सलाह की गुणवत्ता को प्राथमिकता दें। इससे सिर्फ टारगेट पूरा करने के लिए गलत प्रोडक्ट बेचने की प्रवृत्ति कम होगी। इसके अलावा, रेगुलेटर ने इंश्योरेंस कंपनियों को ग्राहकों की शिकायतों की जांच अधिक प्रभावी ढंग से करने का निर्देश दिया है, ताकि समस्याओं को व्यक्तिगत घटनाओं के बजाय सिस्टम की खामियों के रूप में पहचाना जा सके।
डिजिटल पारदर्शिता और उचित व्यवहार
IRDAI इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा दिए जा रहे डिजिटल अनुभव पर भी नजर रख रहा है। 'डार्क पैटर्न्स' यानी ग्राहकों को बरगलाकर या दबाव डालकर व्यक्तिगत जानकारी लेने या उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने वाले मैनिपुलेटिव डिजाइन के इस्तेमाल पर चिंता जताई गई है। रेगुलेटर ने इन प्रथाओं को रोकने के लिए सेल्फ-असेसमेंट ड्राइव और इंडिपेंडेंट मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। साथ ही, ब्रोकर्स को अपने डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट को तर्कसंगत बनाने के लिए कहा गया है, क्योंकि कुछ खर्चे ग्राहकों को दी जाने वाली वास्तविक सेवाओं की तुलना में बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं।
निवेशकों और हितधारकों के लिए, ये बदलाव इंश्योरेंस सेक्टर में अधिक अनुशासित विकास का संकेत देते हैं। इस नीति की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इंश्योरेंस कंपनियां इन ट्रैकिंग सिस्टम को कितनी प्रभावी ढंग से लागू करती हैं और अपने कमीशन स्ट्रक्चर को कैसे समायोजित करती हैं। अब यह देखना बाकी है कि रजिस्ट्री कब लॉन्च होती है और इंश्योरेंस कंपनियां इन नए रेगुलेटरी मानकों को पूरा करने के लिए अपनी आंतरिक नीतियों और डिजिटल इंटरफेस को कितनी जल्दी अपडेट करती हैं।
