IRDAI अब बीमा पॉलिसी बेचने के नाम पर ग्राहकों को ठगने वाले एजेंट्स पर सख्त हो गया है। रेगुलेटर एक पब्लिक डेटाबेस बनाने की तैयारी में है, जिसमें मिस-सेलिंग में शामिल एजेंट्स का नाम सार्वजनिक किया जाएगा।
12 तरह की धोखाधड़ी पर लगाम
रेगुलेटर ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें 12 ऐसे गलत तरीकों की पहचान की गई है जिन्हें 'मिस-सेलिंग' माना जाएगा। इनमें मुख्य रूप से रेगुलर-प्रीमियम पॉलिसी को सिंगल-प्रीमियम बताकर बेचना, सरेंडर के जोखिम न बताना और बिना पूरी जानकारी दिए Unit Linked Insurance Plans (ULIPs) थमाना शामिल है। इसके अलावा, एजेंट्स ग्राहकों को पुरानी पॉलिसी सरेंडर करवाकर नई पॉलिसी लेने के लिए मजबूर करते हैं ताकि अपना कमीशन बना सकें, जिस पर अब लगाम कसी जाएगी।
कमीशन वापसी (Claw-back) का नया नियम
सबसे अहम बदलाव 'कमीशन क्लॉ-बैक' (Claw-back) का है। अगर यह साबित हो जाता है कि पॉलिसी गलत तरीके से बेची गई है, तो इंश्योरेंस कंपनियों को उस एजेंट से कमीशन वापस वसूलना होगा। इससे एजेंट्स का ध्यान सिर्फ तुरंत मिलने वाले पेआउट पर न होकर ग्राहक की जरूरत पर भी होगा।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
यह कदम लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर की 'पर्सिस्टेंसी रेशियो' (Persistency Ratio) को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। पॉलिसी सरेंडर की दर कम होने से इंश्योरेंस कंपनियों को लॉन्ग-टर्म में स्टेबल रेवेन्यू मिलेगा। हालांकि, शुरुआत में कंपनियों को अपनी मॉनिटरिंग और कंप्लायंस सिस्टम को और मजबूत करना होगा। बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या इन सख्त नियमों से शॉर्ट टर्म में नई बिजनेस ग्रोथ पर कोई असर पड़ता है या फिर ग्राहकों का भरोसा बढ़ने से सेक्टर को मजबूती मिलती है।
