इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI अब पॉलिसी बेचने पर दिए जाने वाले कमीशन और खर्चों पर नई पाबंदियां लगाने की तैयारी में है। इसका मकसद इंश्योरेंस को सस्ता बनाना और गलत तरीके से की जाने वाली सेल्स (mis-selling) को रोकना है।
डिस्ट्रिब्यूशन चैनलों पर क्या होगा असर?
भारत में इंश्योरेंस कंपनियां मुख्य रूप से इंडिपेंडेंट एजेंट्स, बैंक पार्टनरशिप और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए पॉलिसी बेचती हैं। फिलहाल इन साथियों को भारी-भरकम कमीशन मिलता है, लेकिन रेगुलेटर द्वारा कैप लगाए जाने से इनका पूरा बिजनेस मॉडल बदल सकता है। इंडस्ट्री को डर है कि अगर कमीशन में 20% से 30% तक की कटौती होती है, तो नए बिजनेस की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है।
मार्जिन बनाम ग्रोथ की जंग
इन्वेस्टर्स के लिए यह खबर मिली-जुली है। अच्छी बात यह है कि कमीशन घटने से कंपनियों का खर्च कम होगा, जिससे प्रति पॉलिसी नेट प्रॉफिट बढ़ सकता है। हालांकि, रिस्क यह है कि अगर एजेंट्स की कमाई घटी, तो वे पॉलिसी बेचने में कम दिलचस्पी दिखाएंगे। रेगुलेटर के चेयरमैन अजय सेठ ने साफ किया है कि इस बदलाव को चरणबद्ध तरीके (Phased Manner) से लागू किया जाएगा ताकि बाजार में कोई हलचल न हो और नौकरियां सुरक्षित रहें।
इन्वेस्टर्स को क्या ट्रैक करना चाहिए?
रेगुलेटर अभी सभी स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक ले रहा है, जिसकी डेडलाइन 25 अक्टूबर तय की गई है। नए नियमों को जनवरी से अप्रैल के बीच लागू किए जाने की संभावना है। आने वाले क्वार्टर्स में जब कंपनियां अपने अर्निंग्स कॉल्स में इस पर मैनेजमेंट कमेंट्री देंगी, तब यह साफ होगा कि कौन सी कंपनी अपनी डिस्ट्रिब्यूशन स्ट्रैटेजी को कैसे बदल रही है। निवेशकों को कंपनियों के रिस्पॉन्स पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
