IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों के लिए नए नियम लाने की तैयारी कर ली है। अब कंपनियों को क्लेम सेटलमेंट रेशियो की गणना सिर्फ संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि क्लेम की गई 'मौद्रिक वैल्यू' के आधार पर करनी होगी।
क्लेम संख्या नहीं, अब 'वैल्यू' बताएगी सच्चाई
अब तक कई बीमा कंपनियां क्लेम सेटलमेंट रेशियो को दिखाने के लिए सिर्फ कुल क्लेम की संख्या (Count) का सहारा लेती थीं। रेगुलेटर ने देखा है कि कंपनियां छोटी राशि वाले बहुत सारे क्लेम को जल्दी सेटल करके अपना रेशियो अच्छा दिखा देती हैं, जबकि बड़े अमाउंट वाले क्लेम को लटकाए रखती हैं। इस हेरफेर को रोकने के लिए IRDAI अब 'अमाउंट-बेस्ड' कैलकुलेशन अनिवार्य करने जा रहा है, जिससे यह पता चलेगा कि वास्तव में पॉलिसीधारकों को कितना पैसा वापस मिल रहा है।
शिकायतों का गलत वर्गीकरण अब नहीं चलेगा
सिर्फ क्लेम ही नहीं, बल्कि ग्राहकों की शिकायतों (Grievances) में भी पारदर्शिता लाने की तैयारी है। IRDAI ने पाया है कि कई बार कंपनियां गंभीर शिकायतों को मामूली सर्विस रिक्वेस्ट बताकर दबा देती हैं। अब रेगुलेटर शिकायत निवारण और सर्विस क्वालिटी के लिए स्टैंडर्ड नियम लागू करेगा, ताकि ग्राहकों को कंपनी की असल परफॉर्मेंस का पता चल सके।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
शेयर बाजार में लिस्टेड इंश्योरेंस कंपनियों के निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है। अब अलग-अलग कंपनियों के प्रदर्शन की तुलना करना आसान होगा। जो कंपनियां अब तक केवल 'नंबर गेम' से अपना बेहतर प्रदर्शन दिखा रही थीं, उन पर अब सख्ती बढ़ेगी। निवेशकों को सलाह है कि वे आने वाले समय में कंपनियों की रिपोर्टिंग में होने वाले बदलावों और रेगुलेटरी सर्कुलर पर कड़ी नजर रखें।
