सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद, IRDAI ने अभी तक दिसंबर 2026 के लिए किसी 'फोर-लेयर' इंश्योरेंस स्ट्रक्चर का अनिवार्य आदेश जारी नहीं किया है। रेगुलेटर का मुख्य ध्यान फिलहाल डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स और कमीशन कैप पर है।
4-लेयर मॉडल का सच
मोटर इंश्योरेंस को चार अलग-अलग हिस्सों (थर्ड-पार्टी लायबिलिटी, पैसेंजर कवर, पर्सनल एक्सीडेंट और ओन-डैमेज) में बांटने का विचार सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आया था, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता लाना है। हालांकि, नवंबर 2026 की शुरुआत तक, रेगुलेटर ने इसे दिसंबर 2026 से लागू करने के लिए कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है।
असली फोकस: डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स
मार्केट का पूरा ध्यान इस समय दूसरे सुधारों पर है। सितंबर 2026 में IRDAI ने 'रीकैलिब्रेटिंग इकोनॉमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन' नाम से एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था। इसमें कमीशन पर कैप लगाने और एक्सपेंस लिमिट को सख्त बनाने का प्रस्ताव है।
यह प्रस्ताव इंश्योरेंस कंपनियों और फिनटेक फर्मों के प्रॉफिट मार्जिन को सीधे प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से अक्टूबर 2026 के दौरान इंश्योरेंस से जुड़े शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
IRDAI चेयरमैन अजय सेठ के अनुसार, रेगुलेटर इंडस्ट्री के सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ सहमति बनाने के बाद ही इन सुधारों को आगे बढ़ाएगा। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी यह देखना है कि कमीशन कैप को लेकर क्या फाइनल फैसला आता है, क्योंकि यही कंपनियों के बिजनेस मॉडल और भविष्य की कमाई पर सबसे ज्यादा असर डालेगा।
