IRDAI ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स पर पब्लिक फीडबैक की डेडलाइन को **31 अक्टूबर 2026** तक बढ़ा दिया है। रेगुलेटर अब कमीशन कैप और मैनेजमेंट खर्चों में बदलाव को लेकर इंडस्ट्री से मिली **650** से ज्यादा सुझावों की समीक्षा कर रहा है।
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने अपने कंसल्टेशन पेपर 'रिकैलिब्रेटिंग इकोनॉमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन' पर स्टेकहोल्डर्स से राय लेने की समय सीमा बढ़ा दी है। रेगुलेटर ने अब तक इस मुद्दे पर 650 से अधिक फीडबैक प्राप्त कर लिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
इस चर्चा का मुख्य केंद्र बीमा कंपनियों के कमीशन कैप और मैनेजमेंट खर्च में संभावित बदलाव है। रेगुलेटर का मानना है कि कमीशन की सीमा तय करने से आक्रामक सेल्स प्रैक्टिस पर रोक लगेगी और पॉलिसीधारकों के लिए बीमा सस्ता होगा। हालांकि, यह निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर दोनों का मिश्रण है।
कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर असर
बीमा कंपनियों के लिए, कमीशन पर लगाम लगाने से ऑपरेशनल खर्च कम हो सकता है और प्रॉफिट मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। दूसरी ओर, इंडस्ट्री को डर है कि कमीशन कम होने से एजेंटों का मनोबल गिर सकता है, जो कि भारत में बीमा बिक्री का सबसे बड़ा जरिया हैं। अगर एजेंट कम कमाई वाले प्रोडक्ट्स से दूरी बनाते हैं, तो कंपनियों का मार्केट शेयर प्रभावित हो सकता है।
सबसे बड़ा असर बीमा ब्रोकर्स और बैंक-आधारित डिस्ट्रीब्यूशन चैनल्स पर पड़ने की संभावना है, जिनकी कमाई का बड़ा हिस्सा कमीशन पर निर्भर करता है। ये डिस्ट्रीब्यूटर्स अब अपने रेवेन्यू मॉडल को फिर से तैयार करने की तैयारी कर रहे हैं। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि रेगुलेटर फाइनल नोटिफिकेशन में कमीशन की लिमिट पर क्या स्टैंड लेता है।
