IRDAI ने इंश्योरेंस कमीशन और खर्चों से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव के लिए पब्लिक कंसल्टेशन का दौर पूरा कर लिया है। नियामक को **650** से ज्यादा सुझाव मिले हैं, जिसके बाद बैंक-लेड डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने इंश्योरेंस कमीशन और एक्सपेंस-ऑफ-मैनेजमेंट (EoM) नियमों में बदलाव के अपने प्रस्तावों पर चर्चा का दौर पूरा कर लिया है। 31 अक्टूबर, 2026 की डेडलाइन के साथ, अब नियामक इंश्योरेंस कंपनियों, बैंकों, एजेंट्स और ब्रोकरेज फर्मों से मिले 650 से ज्यादा सबमिशन की समीक्षा कर रहा है। यह कदम सेक्टर में पारदर्शिता लाने और डिस्ट्रीब्यूशन लागत को कम करने की दिशा में एक अहम मोड़ है।
कमीशन कैप को लेकर विवाद
प्रस्ताव का सबसे विवादास्पद हिस्सा कमीशन स्ट्रक्चर को फिर से तैयार करना है। इसमें क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस सेगमेंट में कमीशन को मौजूदा 40% से घटाकर सीधे 2% करने का सुझाव दिया गया है। बैंकों के लिए, जो बंकाश्योरेंस (Bancassurance) मॉडल का इस्तेमाल करते हैं, यह एक बड़ा झटका हो सकता है। कई इंटरमीडियरीज ने चेतावनी दी है कि अगर इसे बिना बदलाव के लागू किया गया, तो उनकी फीस से होने वाली कमाई में बड़ी गिरावट आ सकती है।
सेक्टर के मुनाफे पर असर
यह रिफॉर्म इंश्योरेंस सेक्टर के लिए मिले-जुले संकेत दे रहा है। एक तरफ, अगर नियामक खर्चों की सीमा (EoM limits) घटाने में सफल रहता है, तो लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार हो सकता है। दूसरी तरफ, कमीशन में भारी कटौती से एजेंट्स की संख्या घट सकती है और थर्ड-पार्टी चैनल्स से आने वाला बिजनेस प्रभावित हो सकता है।
इंडस्ट्री के दिग्गज अब 3 से 5 साल के ट्रांजिशन पीरियड की मांग कर रहे हैं ताकि मौजूदा डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम अचानक न बिगड़े। IRDAI चेयरमैन अजय सेठ ने साफ किया है कि अभी कंसेंसस बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को अब फाइनल गाइडलाइंस का इंतजार है, जो 2027 की शुरुआत में लागू हो सकती हैं। जिन कंपनियों का बंकाश्योरेंस और डिस्ट्रीब्यूशन-हेवी मॉडल ज्यादा है, उनके आने वाले क्वार्टरली रिजल्ट्स और मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
