IRDAI ने पॉलिसीधारकों का खर्च कम करने के लिए डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट पर कैप (सीमा) लगाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, इस फैसले से निवेशकों में चिंता बढ़ गई है और बीमा सेक्टर के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिल रही है, क्योंकि मार्केट को मार्जिन और ग्रोथ घटने का डर सता रहा है।
बीमा सेक्टर के लिए फिलहाल अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। IRDAI (Insurance Regulatory and Development Authority of India) ने हाल ही में 'रिकैलिब्रेटिंग इकोनॉमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन' नाम से एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य एजेंटों और डिस्ट्रीब्यूटरों को दिए जाने वाले कमीशन को सीमित करना है ताकि पॉलिसीधारकों पर बोझ कम हो सके। हालांकि, इस खबर के बाद मार्केट का रिएक्शन काफी नकारात्मक रहा और लिस्टेड बीमा कंपनियों के शेयरों में भारी वोलेटिलिटी देखी गई।
निवेशकों की चिंता की असली वजह
निवेशकों को सबसे बड़ा डर है कि कहीं कमीशन कम होने से नए बिजनेस की ग्रोथ न धीमी हो जाए। बीमा कंपनियां अक्सर अपने पहले साल के प्रीमियम का एक बड़ा हिस्सा एजेंटों और बैंक पार्टनर्स को इंसेंटिव के रूप में देती हैं। अगर कमीशन की सीमा तय कर दी जाती है, तो कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में तो सुधार आ सकता है, लेकिन इस बात का जोखिम भी है कि डिस्ट्रीब्यूटर अब पॉलिसी बेचने में पहले जैसी दिलचस्पी न दिखाएं।
बड़ी और छोटी कंपनियों पर अलग असर
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस नियम का असर सभी कंपनियों पर अलग-अलग होगा। जो पुरानी और बड़ी कंपनियां हैं, उनके पास 'रिन्यूअल बुक' का बड़ा आधार होता है, जो उन्हें स्थिर इनकम देता है। वहीं, नई और छोटी बीमा कंपनियों को मार्केट में जगह बनाने के लिए आक्रामक तरीके से पॉलिसी बेचनी पड़ती है। अगर ये कंपनियां कमीशन के तौर पर आकर्षक स्ट्रक्चर नहीं दे पाईं, तो उनका एजेंट नेटवर्क बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
क्या कस्टमर्स को मिलेगा फायदा?
रेगुलेटर का लक्ष्य भले ही प्रीमियम सस्ता करना हो, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि कमीशन घटने का सीधा फायदा ग्राहकों को ही मिलेगा। बीमा की कीमत कई चीजों—जैसे अंडरराइटिंग कॉस्ट और री-इंश्योरेंस खर्च—पर निर्भर करती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कमीशन के बजाय डिस्क्लोजर और मिस-सेलिंग पर सख्ती ज्यादा प्रभावी हो सकती है। फिलहाल, निवेशक अब IRDAI की अंतिम गाइडलाइंस और इसके लागू होने की टाइमलाइन पर नजरें टिकाए बैठे हैं।
