IRDAI का बड़ा ऐलान: 2030 तक बीमा कवर को दोगुना करने का लक्ष्य, बदल जाएगी सेक्टर की तस्वीर

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AuthorMehul Desai|Published at:
IRDAI का बड़ा ऐलान: 2030 तक बीमा कवर को दोगुना करने का लक्ष्य, बदल जाएगी सेक्टर की तस्वीर

IRDAI ने भारत में इंश्योरेंस पेनिट्रेशन को मौजूदा **15%** से बढ़ाकर **30%** तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। रेगुलेटर इसके लिए डिजिटल टूल्स जैसे 'अकाउंट एग्रीगेटर' (Account Aggregator) फ्रेमवर्क का सहारा लेगा, जिससे बीमा अधिक किफायती और सुलभ बनेगा।

सुरक्षा का दायरा बढ़ाने पर जोर

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने अगले पांच वर्षों में देश में प्रभावी बीमा कवरेज को 30% तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। रेगुलेटर का मुख्य ध्यान अब केवल बेची गई पॉलिसीज की संख्या पर नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से कवर किए गए लोगों और व्यवसायों पर है। यह कदम भारत में मौजूद बड़े प्रोटेक्शन गैप को कम करने में मदद करेगा।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका

इस रणनीति का केंद्र 'अकाउंट एग्रीगेटर' (AA) फ्रेमवर्क है। यह तकनीक वित्तीय डेटा को सुरक्षित तरीके से साझा करने की अनुमति देती है, जिससे कंपनियां ग्राहकों के प्रोफाइल को बेहतर ढंग से समझ सकेंगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि बीमा कंपनियां अपनी ऑपरेशनल कॉस्ट घटाकर और भी किफायती और पर्सनलाइज्ड प्रोडक्ट्स बाजार में ला सकेंगी। रेगुलेटर ने स्पष्ट किया है कि वे UPI की सफलता से सीख लेते हुए इंश्योरेंस को डिजिटल-फर्स्ट बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए संकेत

यह रेगुलेटरी बदलाव बीमा कंपनियों के लिए छोटे शहरों और कस्बों में विस्तार के नए रास्ते खोलेगा। LIC, HDFC Life, SBI Life, ICICI Prudential Life और Star Health जैसी बड़ी कंपनियां पहले ही अपने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर काफी निवेश कर रही हैं। हालाँकि, इन कंपनियों के सामने चुनौती होगी कि वे डिजिटल अपग्रेड की लागत को कैसे मैनेज करती हैं और नए ग्राहकों के बीच भरोसा कैसे बनाती हैं।

हाइब्रिड मॉडल ही कुंजी

रेगुलेटर ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल पुश के बावजूद इंसानी एजेंटों की भूमिका कम नहीं होगी। कॉम्प्लेक्स प्रोडक्ट्स के लिए पर्सनल सलाह आज भी जरूरी है, इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में वितरण (Distribution) को स्केल करने के लिए किया जाएगा। अंततः, सफलता इस पर निर्भर करेगी कि कंपनियां टेक्नोलॉजी को कितनी जल्दी अपनाती हैं और कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट को कैसे नियंत्रित करती हैं। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के टेक्नोलॉजी स्पेंडिंग और उसके मुनाफे पर पड़ने वाले असर पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.