कर्मचारियों को क्यों मिले शेयर?
ICICI Prudential Life Insurance का यह कदम कर्मचारियों को कंपनी के साथ जोड़कर रखने और उनके हितों को शेयरधारकों के दीर्घकालिक हितों से मिलाने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी ने 2005 के ESOP और 2023 के ESUS स्कीम के तहत ये अलॉटमेंट किए हैं। इसमें ESOP (2005) के तहत 128,730 शेयर और ESUS (2023) के तहत 2,100 शेयर जारी किए गए हैं।
शेयरधारकों के लिए क्या मतलब?
खास बात यह है कि ये नए जारी किए गए शेयर मौजूदा इक्विटी शेयरों के ' pari-passu' होंगे। इसका मतलब है कि नए आवंटित शेयरों पर भी उतने ही अधिकार होंगे, जितने पुराने शेयरों पर हैं। इनमें डिविडेंड (Dividend) और वोटिंग राइट्स (Voting Rights) दोनों शामिल हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि नए और पुराने सभी शेयरधारकों के साथ समान व्यवहार हो।
यह पहली बार नहीं है
ICICI Prudential Life Insurance के लिए कर्मचारियों को स्टॉक-आधारित कंपनसेशन प्लान के जरिए शेयर बांटना कोई नई बात नहीं है। कंपनी पहले भी ऐसे अलॉटमेंट करती रही है। हाल ही में 17 फरवरी, 2026 को 460,058 शेयर और 24 फरवरी, 2026 को 124,912 शेयर भी कर्मचारियों को आवंटित किए गए थे। कंपनी के बोर्ड ने 22 जनवरी, 2019 को ही ऐसे अलॉटमेंट के लिए अथॉरिटी डेलीगेट कर दी थी, ताकि प्रक्रिया आसान बनी रहे।
आगे क्या होगा?
इस अलॉटमेंट से कंपनी की इश्यू की गई और पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल में मामूली बढ़ोतरी होगी, जिससे कुल आउटस्टैंडिंग शेयरों की संख्या 130,830 बढ़ जाएगी। जिन कर्मचारियों को ये शेयर मिले हैं, अब वे कंपनी के प्रदर्शन से सीधे तौर पर जुड़ जाएंगे।
कंपनी के सामने जोखिम
हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ICICI Prudential Life Insurance कुछ वित्तीय जोखिमों का सामना कर रही है। मार्च 2025 में, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 2023-24 फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹328.41 करोड़ का टैक्स डिमांड नोटिस जारी किया था, जिसके खिलाफ कंपनी अपील करेगी। इसके अलावा, दिसंबर 2025 में 2022 फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹8.5 करोड़ का GST ऑर्डर भी आया था, जिस पर भी कंपनी अपील करने वाली है।
अहम आंकड़े
31 दिसंबर, 2025 तक, ICICI Prudential Life का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹3.31 लाख करोड़ था। कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो 214.8% था, जो कि रेगुलेटरी आवश्यकता 150% से काफी ऊपर है।
निवेशकों के लिए ट्रैक करने लायक बातें
- भविष्य में ESOP और ESUS स्कीम के तहत होने वाले अलॉटमेंट।
- GST और इनकम टैक्स डिमांड नोटिस के खिलाफ कंपनी की अपील का नतीजा।
- कंपनी के न्यू बिजनेस सम अश्योर्ड (NBSA) और नेट प्रॉफिट (PAT) जैसे वित्तीय प्रदर्शन पर नजर रखें।