क्यों गिर रहे हैं शेयर, जबकि नतीजे बेहतर?
14 अप्रैल को ICICI Prudential Life Insurance की बोर्ड मीटिंग होनी है, जहाँ कंपनी अपने ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स (Audited Financial Results) पेश करेगी और वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए डिविडेंड (Dividend) पर फैसला लेगी। हालाँकि, शेयर बाजार में यह कंपनी जबरदस्त गिरावट का सामना कर रही है। इस साल की शुरुआत से अब तक शेयर 19.81% टूट चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Profit After Tax) 19.2% बढ़कर ₹387.15 करोड़ रहा और VNB ग्रोथ 19% बढ़कर ₹615 करोड़ दर्ज की गई। इसके बावजूद, शेयर का गिरना बाजार के गहरे अंदरूनी मुद्दों की ओर इशारा कर रहा है।
पीयर कंपेरिजन और वैल्यूएशन पर सवाल
भारतीय लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन ICICI Prudential का वैल्यूएशन (Valuation) कुछ प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले फीका नजर आ रहा है। इस साल अप्रैल की शुरुआत तक, कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो करीब 58-66x था, जबकि SBI Life Insurance का 82x और HDFC Life Insurance का 69x से 87x के बीच था। Q3 FY26 में ICICI Prudential के 24.4% VNB मार्जिन, HDFC Life के 22.8% और SBI Life के 27.1% (FY25) मार्जिन के मुकाबले ठीक-ठाक थे। शेयर की 52-हफ्ते की रेंज ₹706.80 (जनवरी 2026) से गिरकर ₹491.45 (अप्रैल 2026) तक आ गई है, जो बाजार में अनिश्चितता दिखाती है।
बड़े टैक्स डिमांड का खतरा
शेयरों में लगातार गिरावट का एक बड़ा कारण कंपनी पर लगे भारी टैक्स डिमांड (Tax Demands) हो सकते हैं। कंपनी के ऊपर वित्त वर्ष 2019 (FY2019) के लिए ₹2,407.78 करोड़ का टैक्स बकाया है, जिसे कंपनी चुनौती दे रही है। साथ ही, असेसमेंट ईयर 2024-25 के लिए ₹391 करोड़ से अधिक का एक और टैक्स आर्डर आया है, जो भी अपील में है। ये भारी संभावित देनदारियां शेयरधारकों के लिए चिंता का विषय हैं। ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा मार्केट कैप वाली SBI Life और ₹1.27-1.56 लाख करोड़ वाली HDFC Life जैसी बड़ी कंपनियां निवेशकों को ज्यादा स्थिर लग सकती हैं।
एनालिस्ट्स की राय क्या है?
इसके बावजूद, ज्यादातर एनालिस्ट्स (Analysts) ICICI Prudential Life Insurance के शेयर पर 'Buy' रेटिंग बनाए हुए हैं। उनका औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस मौजूदा स्तर से 32-45% ऊपर, यानी करीब ₹772 तक जाने का अनुमान है। हालाँकि, शेयर में रिकवरी के लिए कंपनी को न सिर्फ अपने टैक्स संबंधी विवादों को सुलझाना होगा, बल्कि प्रतिस्पर्धी बाजार में लगातार प्रॉफिटेबल ग्रोथ भी दिखानी होगी जो सेक्टर के औसत से बेहतर हो।