ICICI Lombard के मुनाफे में भारी गिरावट, ₹403 करोड़ पर आया नेट प्रॉफिट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ICICI Lombard के मुनाफे में भारी गिरावट, ₹403 करोड़ पर आया नेट प्रॉफिट

ICICI Lombard General Insurance के लिए यह तिमाही उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। कंपनी ने तिमाही के लिए **₹403 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल इसी अवधि के **₹747 करोड़** की तुलना में काफी कम है। बढ़ते मोटर और फायर इंश्योरेंस क्लेम के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के कारण कंपनी को अतिरिक्त प्रोविजन (Provision) करना पड़ा, जिससे मुनाफे पर असर पड़ा।

Detailed Coverage

क्यों गिरी कंपनी की कमाई?

ICICI Lombard General Insurance का नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹747 करोड़ से घटकर इस तिमाही में ₹403 करोड़ रह गया है। इस गिरावट की मुख्य वजहें एक साथ कई अनपेक्षित घटनाएं रहीं, जिनमें आग लगने से हुए बड़े क्लेम और मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के लिए प्रोविजन में हुई वृद्धि शामिल है।

कंपनी के अंडरराइटिंग परफॉर्मेंस, जो कि पॉलिसी जारी करने के मुख्य बिजनेस से होने वाले मुनाफे को मापता है, में भी भारी गिरावट देखी गई। कंपनी का कंबाइंड रेशियो (Combined Ratio) बढ़कर 107.2% हो गया है। यह रेशियो बताता है कि कंपनी प्रीमियम से जितनी कमाई कर रही है, उससे ज्यादा क्लेम और खर्चों में भुगतान कर रही है। पिछले फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में यह रेशियो 102.9% था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और फायर क्लेम का असर

मुनाफे में गिरावट का एक बड़ा कारण ₹165 करोड़ का प्रोविजन है जो कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद किया। 11 जून 2026 के इस फैसले में कोर्ट ने मोटर थर्ड-पार्टी दुर्घटना क्लेम में होममेकर (गृहणी) पीड़ितों के लिए मुआवजे की राशि बढ़ाने का निर्देश दिया है, जिसमें न्यूनतम मासिक आय ₹30,000 मानी जाएगी। इस रेगुलेटरी बदलाव के अलावा, कंपनी को आग लगने की दो बड़ी घटनाओं से भी नुकसान उठाना पड़ा।

सेगमेंट परफॉर्मेंस और इंडस्ट्री ट्रेंड्स

मोटर इंश्योरेंस सेगमेंट, जो कंपनी के प्रीमियम ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण है, पर अपने नुकसान (own-damage) और थर्ड-पार्टी दोनों पॉलिसियों के लिए दबाव देखा गया। कंपनी का मोटर इंश्योरेंस पोर्टफोलियो इंडस्ट्री के औसत के मुकाबले बेहतर है, लेकिन थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी न होने के कारण बढ़ते क्लेम को संभालना मुश्किल हो रहा है।

इसके अलावा, फायर इंश्योरेंस सेगमेंट में प्रीमियम 32% तक गिर गया, क्योंकि कंपनी ने घटते बाजार में वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय अंडरराइटिंग अनुशासन को प्राथमिकता दी। पूरे जनरल इंश्योरेंस सेक्टर में भी फायर इंश्योरेंस प्रीमियम में लगभग 27.8% की गिरावट आई है।

निवेशकों के लिए मुख्य बिंदु

कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) पिछले साल के 20.5% से घटकर 9.6% रह गया है। यह इन एकमुश्त प्रोविजन्स और बढ़े हुए क्लेम का सीधा असर दिखाता है। आगे, निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि क्या इंडस्ट्री को मोटर थर्ड-पार्टी टैरिफ बढ़ाने की रेगुलेटरी मंजूरी मिलती है, क्योंकि कई एनालिस्ट मानते हैं कि यह अंडरराइटिंग मार्जिन को ठीक करने के लिए जरूरी है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी की कंबाइंड रेशियो को मैनेज करने की क्षमता और फायर इंश्योरेंस सेगमेंट में रिकवरी की गति मुख्य फोकस रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.