IRDAI के टूल से पाएं इंश्योरेंस का डूबा पैसा, जानें पूरा तरीका

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
IRDAI के टूल से पाएं इंश्योरेंस का डूबा पैसा, जानें पूरा तरीका

क्या आपका या आपके किसी अपने का इंश्योरेंस क्लेम (Insurance Claim) या मैच्योरिटी का पैसा रुका हुआ है? IRDAI के नए नियमों के तहत, अब आप इंश्योरेंस कंपनियों की वेबसाइट पर जाकर भूले हुए क्लेम को आसानी से ढूंढ सकते हैं और उसे वापस पा सकते हैं।

इंश्योरेंस में फंसे पैसे को ऐसे निकालें बाहर!

कई बार ऐसा होता है कि इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर या उनके परिवार को पता ही नहीं चलता कि बीमा कंपनी के पास उनका काफी पैसा फंसा हुआ है। ये पैसा मैच्योरिटी प्रोसीड्स (Maturity Proceeds), डेथ क्लेम (Death Claims), सर्वाइवल बेनिफिट्स (Survival Benefits) या प्रीमियम रिफंड (Premium Refunds) के रूप में हो सकता है। ऐसा अक्सर इसलिए होता है क्योंकि परिवार को पॉलिसी के बारे में जानकारी नहीं होती या फिर पॉलिसी होल्डर ने कंपनी के पास अपना पता या कॉन्टैक्ट डिटेल्स अपडेट नहीं करवाई होतीं।

इंश्योरर की वेबसाइट पर ऐसे करें सर्च

भारत में सभी इंश्योरेंस कंपनियों को भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के दिशानिर्देशों का पालन करना होता है। इसके तहत, कंपनियों को उन अनक्लेम्ड (Unclaimed) अमाउंट की लिस्ट अपनी वेबसाइट पर पब्लिश करनी होती है जो छह महीने से ज्यादा समय से उनके पास पड़े हैं। आप या आपके कानूनी वारिस इन लिस्ट्स को सीधे इंश्योरेंस कंपनियों की ऑफिशियल वेबसाइट्स पर जाकर देख सकते हैं। इन पोर्टल्स पर आप पॉलिसी होल्डर के नाम, जन्मतिथि, पैन नंबर या पॉलिसी नंबर जैसी जानकारी डालकर सर्च कर सकते हैं। अगर आपको अपना अनक्लेम्ड अमाउंट मिलता है, तो आपको उस खास इंश्योरेंस कंपनी के बताए प्रोसेस को फॉलो करना होगा।

अपनी एलिजिबिलिटी और डॉक्यूमेंट्स चेक करें

इंश्योरर से कॉन्टैक्ट करने से पहले, अपने पर्सनल रिकॉर्ड्स जैसे कि प्रीमियम पेमेंट की पुरानी रसीदें, पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स या कोई भी पत्राचार जो पुरानी पॉलिसी की ओर इशारा करता हो, उसे इकट्ठा कर लें। जब आपको इंश्योरर के डेटाबेस में कोई मैच मिलता है, तो कंपनी आपकी पहचान वेरिफाई करने के लिए कुछ डॉक्यूमेंट्स मांगेगी। आमतौर पर, इसमें आपके पैन कार्ड, पते का प्रूफ और फंड ट्रांसफर के लिए एक्टिव बैंक अकाउंट की डिटेल्स शामिल होती हैं। अगर आपके पास ओरिजिनल पॉलिसी बॉन्ड है, तो उसे सबमिट करने से वेरिफिकेशन प्रोसेस तेज हो सकता है।

डेथ क्लेम और कानूनी वारिस के मामले

अगर पॉलिसी होल्डर की मृत्यु हो चुकी है, तो डॉक्यूमेंट्स की जरूरतें और बढ़ जाती हैं। क्लेमेंट को डेथ सर्टिफिकेट के साथ-साथ ऐसे डॉक्यूमेंट्स भी देने होंगे जो नॉमिनी (Nominee) या कानूनी वारिस (Legal Heir) के तौर पर आपकी पहचान साबित करें। अगर पॉलिसी में कोई नॉमिनी नहीं है या फिर क्लेम्स को लेकर कोई विवाद है, तो इंश्योरर को यह सुनिश्चित करने के लिए कि पैसा सही व्यक्ति को मिले, अतिरिक्त कानूनी डॉक्यूमेंट्स जैसे सक्सेशन सर्टिफिकेट (Succession Certificate) या लीगल हेयर सर्टिफिकेट (Legal Heir Certificate) की मांग की जा सकती है। भविष्य में ऐसे अनक्लेम्ड अमाउंट्स से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी कॉन्टैक्ट डिटेल्स हमेशा अपडेट रखें और परिवार के सदस्यों को अपनी पॉलिसियों की जानकारी देते रहें।

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