हेल्थ इंश्योरेंस रिन्यूअल को सिर्फ एक साधारण बिल पेमेंट न समझें। भारत में मेडिकल इन्फ्लेशन लगभग **14%** की दर से बढ़ रहा है, ऐसे में आपकी पुरानी पॉलिसी कम पड़ सकती है। किसी भी इमरजेंसी से बचने के लिए अपने सम इंश्योर्ड और हॉस्पिटल नेटवर्क को हर साल जरूर चेक करें।
ज्यादातर पॉलिसीहोल्डर हेल्थ इंश्योरेंस रिन्यूअल को एक रूटीन काम की तरह देखते हैं, जिसे हर साल बस पेमेंट करके निपटा दिया जाता है। लेकिन इसे ऑटो-पायलट मोड पर छोड़ना एक बड़ी फाइनेंशियल गलती हो सकती है। भारत में मेडिकल इन्फ्लेशन 14% की रफ्तार से बढ़ रही है, जिसका मतलब है कि जो कवर 5 साल पहले पर्याप्त था, वह आज के इलाज के महंगे खर्चों के सामने छोटा पड़ सकता है।
सम इंश्योर्ड का सही आकलन
रिन्यूअल के वक्त सबसे पहले यह देखें कि क्या आपका सम इंश्योर्ड आज के मेडिकल खर्चों के हिसाब से काफी है। सर्जरी, डायग्नोस्टिक्स और अस्पताल में भर्ती होने के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। यदि आपको लगता है कि आपका 5 या 10 लाख का कवर अब पर्याप्त नहीं है, तो अपने प्रोवाइडर से इसे बढ़ाने के बारे में बात करें। भले ही बढ़े हुए कवर के लिए कुछ नए वेटिंग पीरियड लगें, लेकिन हेल्थ क्राइसिस के वक्त अंडर-इंश्योर्ड होने से बचना ज्यादा जरूरी है।
पॉलिसी की बारीकियों को समझें
प्रीमियम में बढ़ोतरी अक्सर देखने को मिलती है, लेकिन इसके पीछे की वजह जरूर समझें। प्रीमियम बढ़ने का कारण उम्र, इंश्योरर का नया प्राइसिंग मॉडल या प्रोडक्ट में बदलाव हो सकता है। सस्ती पॉलिसी के चक्कर में 'रूम-रेंट कैप', 'सब-लिमिट्स' या 'को-पेमेंट' जैसी शर्तों को अनदेखा न करें। IRDAI के नियमों के अनुसार, किसी भी बड़े बदलाव की जानकारी इंश्योरेंस कंपनी को 90 दिन पहले देनी होती है, ताकि आप दूसरी पॉलिसीज से तुलना कर सकें।
हॉस्पिटल नेटवर्क चेक करें
कैशलेस नेटवर्क हमेशा एक जैसा नहीं रहता। हो सकता है कि जिस अस्पताल में आप इलाज कराना पसंद करते हैं, वह अब आपकी कंपनी के नेटवर्क लिस्ट से बाहर हो गया हो। इसलिए रिन्यूअल से पहले लेटेस्ट हॉस्पिटल लिस्ट जरूर चेक करें। अगर आपका पसंदीदा हॉस्पिटल अब नेटवर्क में नहीं है, तो रिइम्बर्समेंट (Reimbursement) की प्रक्रिया को पहले ही समझ लें ताकि इमरजेंसी में दिक्कत न हो।
निरंतरता का महत्व (Continuity Benefits)
हेल्थ इंश्योरेंस में वेटिंग पीरियड और 'नो-क्लेम बोनस' को बचाने के लिए पॉलिसी का समय पर रिन्यू होना बहुत जरूरी है। अगर आपको लगता है कि आपकी वर्तमान पॉलिसी आपकी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही है, तो आप 'पोर्टेबिलिटी' (Portability) का विकल्प चुन सकते हैं। इसके जरिए आप अपनी पुरानी पॉलिसी के वेटिंग पीरियड क्रेडिट को दूसरी कंपनी में ट्रांसफर कर सकते हैं। बस ध्यान रखें कि नई पॉलिसी एक्टिव होने के बाद ही पुरानी पॉलिसी को बंद करें, ताकि आपकी कंटिन्यूटी बनी रहे।
