बीमा कंपनियां अब देश को अलग-अलग प्राइसिंग ज़ोन में बांट रही हैं, जो कि वहां के लोकल मेडिकल ट्रीटमेंट और हॉस्पिटल के खर्चों पर आधारित हैं। इसका सीधा असर प्रीमियम पर पड़ता है। बड़े शहरों में छोटे शहरों के मुकाबले प्रीमियम काफी ज्यादा होता है। मिसाल के तौर पर, दिल्ली में रहने वाला एक 25 साल का व्यक्ति अगर वही प्लान लेता है जो लखनऊ में कोई ले रहा है, तो उसे सालाना करीब ₹15,111 भरने पड़ सकते हैं, जबकि लखनऊ वाले को सिर्फ ₹10,012 में वही कवरेज मिल सकता है। यह अंतर लगभग 50% का है, और यह सिर्फ लोकेशन की वजह से है। बीमा कंपनियों का कहना है कि बड़े शहरों में हॉस्पिटल के कमरे, डॉक्टर की फीस और सर्जरी का खर्च छोटे शहरों से कहीं ज्यादा होता है। जैसे, दिल्ली में एक अपेंडिक्स सर्जरी पर ₹2 लाख से ज्यादा का खर्च आ सकता है, वहीं टियर 2 शहर में यह ₹80,000 से ₹1.2 लाख के बीच हो सकता है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। 'PAN-India' कवरेज वाले प्लान भी आपके लिए मुश्किल खड़े कर सकते हैं, अगर आप किसी ऊंचे खर्च वाले शहर में इलाज कराते हैं। छोटे शहरों या टियर 2 सिटीज़ में रहने वाले लोग, जिन्हें किसी बड़े मेट्रो शहर में मेडिकल केयर की ज़रूरत पड़ती है, उन्हें 'को-पेमेंट' (Co-payment) क्लॉज का सामना करना पड़ सकता है। इसका मतलब है कि आपको मेडिकल बिल का एक हिस्सा, शायद 20% या उससे ज़्यादा, खुद देना होगा। यानी, प्रीमियम में हजारों की जो बचत आपने साल भर में की, वह अचानक अस्पताल में भर्ती होने पर हज़ारों के अप्रत्याशित खर्च में बदल सकती है। उदाहरण के लिए, जयपुर जैसे शहर में ₹10 लाख का प्लान मुंबई के मुकाबले 15-25% सस्ता हो सकता है, लेकिन अगर इलाज महंगे शहर में हुआ तो को-पेमेंट की वजह से प्रीमियम का यह अंतर खत्म हो सकता है।
हालांकि, यह लोकेशन-आधारित प्रीमियम सिस्टम बीमा कंपनियों के लिए भले ही लॉजिकल लगे, लेकिन यह स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में असमानता पैदा कर सकता है। यह उन लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है जो नौकरी या किसी और वजह से बड़े शहरों में जाते हैं। खासकर युवा लोगों को ज्यादा प्रीमियम भरना पड़ सकता है या फिर इलाज के समय दिक्कतें आ सकती हैं। अलग-अलग बीमा कंपनियों के ज़ोन क्लासिफिकेशन में एकरूपता न होने से ग्राहक भ्रमित हो सकते हैं और बिल को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है।
एक्सपर्ट्स (Experts) की सलाह है कि सिर्फ सबसे कम प्रीमियम देखकर हेल्थ प्लान न चुनें। अपनी संभावित भविष्य की ज़रूरतें और आप कहां इलाज करा सकते हैं, इन बातों पर गहराई से विचार करें। जो लोग एडवांस मेडिकल केयर की उम्मीद रखते हैं या बुजुर्ग हैं, उनके लिए ज़्यादा ज़ोन क्लासिफिकेशन वाला प्लान या ऐसा PAN-India प्लान चुनना बेहतर होगा जो ज़ोन-आधारित प्रतिबंधों को कम करे। यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि इंश्योर्ड सम (Sum Insured) कम से कम ₹10 लाख से ₹20 लाख के बीच हो। साथ ही, अगर आप अपना घर बदलते हैं तो अपने बीमा कंपनी को तुरंत सूचित करें, ताकि प्रीमियम सही तरह से एडजस्ट हो सके और क्लेम के समय कोई दिक्कत न आए।