Health Insurance Portability Rules 2026: प्री-एग्जिस्टिंग बीमारियों के वेटिंग पीरियड का लाभ न गंवाएं!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Health Insurance Portability Rules 2026: प्री-एग्जिस्टिंग बीमारियों के वेटिंग पीरियड का लाभ न गंवाएं!

साल 2026 से, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसीहोल्डर्स के लिए अच्छी खबर है! अब आप अपनी मौजूदा पॉलिसी के प्री-एग्जिस्टिंग बीमारियों (pre-existing diseases) पर हुए वेटिंग पीरियड के लाभ को खोए बिना, किसी दूसरे इंश्योरेंस प्रोवाइडर के पास आसानी से स्विच कर सकेंगे। IRDAI (Insurance Regulatory and Development Authority of India) द्वारा रेगुलेट की जाने वाली यह सुविधा आपको बेहतर फीचर्स या प्रीमियम वाले इंश्योरर चुनने का मौका देती है।

कैसे करें हेल्थ इंश्योरेंस पोर्ट?

IRDAI की ओर से दी गई यह सुविधा, हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी (Health Insurance Portability) कहलाती है। इसका मतलब है कि आपकी पुरानी पॉलिसी पर जितनी अवधि आपने प्री-एग्जिस्टिंग बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड में बिताई है, वह नई पॉलिसी में भी गिनी जाएगी। इससे आपको बार-बार लंबी वेटिंग पीरियड की शुरुआत से नहीं गुजरना पड़ेगा, जो अक्सर लोगों को बेहतर प्लान होने के बावजूद इंश्योरर बदलने से रोकता है।

यह नियम इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस और फैमिली फ्लोटर प्लान दोनों पर लागू होता है। पोर्टेबिलिटी को सफल बनाने के लिए, पुरानी और नई पॉलिसी के बीच कवरेज में कोई गैप नहीं होना चाहिए।

पोर्टेबिलिटी के लिए जरूरी बातें:

  • समय सीमा: आपको अपनी मौजूदा पॉलिसी के रिन्यूअल की तारीख से कम से कम 30 दिन पहले नई इंश्योरेंस कंपनी के पास पोर्टेबिलिटी के लिए अप्लाई करना होगा।
  • जल्दी करें: नई इंश्योरेंस कंपनी को पुरानी कंपनी से आपकी पॉलिसी और क्लेम हिस्ट्री की जानकारी वेरिफाई करने के लिए समय चाहिए होता है, जो एक सेंट्रलाइज्ड इंडस्ट्री डेटा एक्सचेंज सिस्टम के जरिए होता है।

अंडरराइटिंग और सीमाएं:

यह ध्यान रखना जरूरी है कि पोर्टेबिलिटी वेटिंग पीरियड क्रेडिट को जारी रखती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी एप्लीकेशन अपने आप मंजूर हो जाएगी। हर नई इंश्योरेंस कंपनी अपनी अंडरराइटिंग (Underwriting) करेगी। इसमें आपकी मौजूदा हेल्थ कंडीशन, मेडिकल हिस्ट्री और पिछले क्लेम की जांच की जाएगी। इसके आधार पर, कंपनी आपकी एप्लीकेशन को स्वीकार कर सकती है, कुछ शर्तों के साथ कवर दे सकती है, या पूरी तरह से खारिज भी कर सकती है।

अगर आप नई पॉलिसी लेते समय सम एश्योर्ड (Sum Insured) की राशि बढ़ाते हैं, तो बढ़ी हुई राशि पर आपको नया वेटिंग पीरियड झेलना पड़ सकता है। इसलिए, जब तक नई इंश्योरेंस कंपनी से कन्फर्मेशन न मिल जाए, तब तक अपनी पुरानी पॉलिसी को एक्टिव रखना समझदारी है।

क्या-क्या देखें?

नई इंश्योरेंस कंपनी चुनते समय सिर्फ प्रीमियम पर ध्यान न दें। इंश्योरर के क्लेम सेटलमेंट का रिकॉर्ड, अस्पतालों का नेटवर्क और नई पॉलिसी के नियम व शर्तें (Terms and Exclusions) जैसी बातों पर भी गौर करें। एक अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी वो है जो किफायती प्रीमियम और मेडिकल इमरजेंसी के समय भरोसेमंद कवरेज का सही संतुलन प्रदान करे। फाइनल फैसला लेने से पहले, पुरानी और नई पॉलिसी के बारीक डिटेल्स की तुलना जरूर करें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.