हेल्थ इंश्योरेंस की धूम, बाकी सेगमेंट पीछे
FY26 में India's Non-life Insurance sector में हेल्थ इंश्योरेंस सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बनकर उभरा। इस सेगमेंट ने 40.8% मार्केट शेयर पर कब्ज़ा जमा लिया, जो पिछले साल 38.6% था। प्रीमियम में 15.4% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई और यह लगभग ₹1.4 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह ओवरऑल नॉन-लाइफ इंडस्ट्री की 9.3% ग्रोथ से कहीं ज़्यादा है, जिसने कुल ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम करीब ₹3.4 लाख करोड़ दर्ज की।
Standalone health insurers ने भी ज़बरदस्त परफॉरमेंस दी, 19.4% की ग्रोथ के साथ ₹44,863.7 करोड़ का प्रीमियम अंडरराइट किया। इस लिस्ट में New India Assurance सबसे आगे रही, जिसने ₹21,531.5 करोड़ का प्रीमियम हासिल किया। वहीं, Star Health & Allied Insurance ₹18,435 करोड़ के साथ दूसरे नंबर पर रही।
वैल्यूएशन में बड़ा अंतर
वहीं, प्रमुख प्लेयर्स के वैल्यूएशन में बड़ा अंतर देखने को मिला। New India Assurance, जो ओवरऑल नॉन-लाइफ प्रीमियम में मार्केट लीडर है, का TTM पी/ई रेशियो लगभग 22.31 है और मार्केट कैप ₹266.28 बिलियन है। इसकी तुलना में, ICICI Lombard का पी/ई रेशियो करीब 31.80-32.86 है और मार्केट कैप ₹875-910 बिलियन के आसपास है। Star Health & Allied Insurance, जो एक बड़ा हेल्थ इंश्योरर है, का TTM पी/ई रेशियो सबसे ज़्यादा, 54.92 से 61.9 के बीच है। इसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹30,586.8 करोड़ है। यह वैल्यूएशन गैप बताता है कि मार्केट इन कंपनियों की ग्रोथ और रिस्क प्रोफाइल को अलग-अलग नज़र से देख रहा है।
मोटर और अन्य सेगमेंट में सुस्ती
हेल्थ इंश्योरेंस की शानदार ग्रोथ के बावजूद, दूसरे ज़रूरी सेगमेंट दबाव में दिखे। मोटर इंश्योरेंस, जो दूसरा सबसे बड़ा सेगमेंट है, उसका शेयर करीब 32.2% पर स्थिर रहा। प्रीमियम ₹1.1 लाख करोड़ रहा और ग्रोथ 9.2% देखी गई। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती मांग से थोड़ा सहारा मिला, लेकिन प्राइसिंग प्रेशर और बढ़ते क्लेम कॉस्ट के कारण इस सेगमेंट का प्रदर्शन सीमित रहा। फायर इंश्योरेंस में मामूली बढ़ोतरी हुई और इसका शेयर 8.2% तक पहुंचा। हालांकि, मिसलेनियस सेगमेंट में 17.6% की भारी गिरावट आई, जिससे इसका शेयर 12.6% से घटकर 9.5% रह गया। यह दिखाता है कि सेक्टर की ग्रोथ अब एक ही सेगमेंट पर बहुत ज़्यादा निर्भर हो गई है।
भविष्य की चुनौतियाँ और आउटलुक
हेल्थ इंश्योरेंस पर यह ज़्यादा निर्भरता इंडस्ट्री के लिए सिस्टमैटिक रिस्क (systemic risk) पैदा कर सकती है। हेल्थ इंश्योरेंस की प्राइसिंग या कवरेज को लेकर रेगुलेटरी बदलाव या मेडिकल इन्फ्लेशन (medical inflation) के कारण इंडस्ट्री पर भारी पड़ सकता है। Star Health, जिसका हाई पी/ई रेशियो (लगभग 55-61x) है, पर विशेष नज़र रहेगी क्योंकि यह अपने ग्रॉस रिटन प्रीमियम (GWP) टारगेट को हासिल करने की कोशिश कर रही है। इसका बिज़नेस लगभग 96% रिटेल हेल्थ सेगमेंट पर निर्भर है, जो इसे हेल्थकेयर कॉस्ट में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाता है।
इसके अलावा, New India Assurance, जो मार्केट लीडर है, पिछले 5 सालों में केवल 8.87% की धीमी सेल्स ग्रोथ और पिछले 3 सालों में 2.35% का कम रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) दिखा चुकी है। इंडस्ट्री का कंबाइंड रेश्यो लगातार 100% से ऊपर बना हुआ है, जो प्रीमियम ग्रोथ के बावजूद अंडरराइटिंग लॉसेस (underwriting losses) का संकेत देता है। मिसलेनियस सेगमेंट में आई भारी गिरावट भी पारंपरिक इंश्योरेंस लाइनों पर व्यापक आर्थिक या सेक्टरल हेडविंड्स (headwinds) को दर्शाती है।
एनालिस्ट्स का मानना है कि FY27 में नॉन-लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री की ग्रोथ FY26 की तुलना में घटकर हाई सिंगल डिजिट में रह सकती है। हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस मुख्य सेगमेंट बने रहने की उम्मीद है। सेक्टर डिजिटलाइजेशन और इंश्योरेंस पेनिट्रेशन (insurance penetration) को बढ़ाने वाले फेवरेबल रेगुलेटरी माहौल का फायदा उठाता रहेगा। हालांकि, अब फोकस वॉल्यूम-ड्रिवन स्ट्रैटेजी से हटकर प्रॉफिटेबिलिटी, कैपिटल एफिशिएंसी और अंडरराइटिंग डिसिप्लिन (underwriting discipline) की ओर बढ़ रहा है। इंश्योरर्स को सस्टेनेबल ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए क्लेम्स इन्फ्लेशन, प्राइसिंग प्रेशर और बदलते रिस्क लैंडस्केप को पार करना होगा। रिटेल हेल्थ जैसे हाई-ग्रोथ सेगमेंट में एजिलिटी (agility) के कारण प्राइवेट प्लेयर्स के पब्लिक सेक्टर इंश्योरर्स से बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद बनी रहेगी।
