भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने एक्सपोर्ट शिपमेंट के लिए रिस्क कवर प्रोग्राम को **मार्च 2027** तक बढ़ा दिया है, जिसमें **95%** तक कवरेज मिलेगी। यह कदम पश्चिम एशियाई समुद्री मार्गों में आ रही बाधाओं और बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्च से निपटने में मदद करेगा।
भारत सरकार ने एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए 'Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation' प्रोग्राम को विस्तार दे दिया है। इसका सीधा मकसद घरेलू कंपनियों को सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों से एक मजबूत वित्तीय कवच (Financial Shield) प्रदान करना है। अब निर्यातक अपने शिपमेंट पर 95% तक का रिस्क कवर सुरक्षित कर सकेंगे। यह नीति मार्च 2027 तक लागू रहेगी, जो लॉजिस्टिक्स में आ रही अस्थिरता के कारण होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई में एक बफर की तरह काम करेगी।
क्यों है यह फैसला अहम?
यह सरकारी समर्थन उन भारतीय कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है जो यूरोप और नॉर्थ अमेरिका के बाजारों में सामान भेजती हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण शिपिंग कंपनियों को अपने जहाज दूसरे रूट से ले जाने पड़ रहे हैं, जिससे फ्रेट और इंश्योरेंस का खर्च काफी बढ़ गया है। सरकार के इस सुरक्षा घेरे के बिना, यह बढ़ा हुआ खर्च सीधे तौर पर एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर चोट कर रहा था।
निवेशकों के लिए संकेत
टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर्स, जो पतले मार्जिन (Thin Margins) पर काम करते हैं, उनके लिए यह राहत का बड़ा साधन है। इन इंडस्ट्रीज के शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों को अब आने वाली तिमाही नतीजों (Quarterly Results) में यह देखना होगा कि कंपनियां इन बढ़ती लागतों को मैनेज करने में कितनी सक्षम हैं। हालांकि यह स्कीम लंबी अवधि के लिए एक स्थिर माहौल तो देती है, लेकिन कंपनियों का प्रदर्शन अंततः वैश्विक ट्रेड की स्थितियों और समुद्री रूट की चुनौतियों पर ही निर्भर करेगा।
