Generali Central Insurance अब हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम को शहर के मेडिकल खर्चों से जोड़ने की तैयारी कर रही है। साथ ही कंपनी डिजिटल सुरक्षा की बढ़ती मांग को देखते हुए साइबर-इंश्योरेंस सेगमेंट में भी उतर रही है।
प्रीमियम का नया गणित
कंपनी के एमडी और सीईओ KG Krishnamoorthy Rao के नेतृत्व में, Generali Central Insurance एक ऐसे मॉडल पर काम कर रही है जहां प्रीमियम सीधे उस शहर की मेडिकल महंगाई से जुड़ा होगा। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य बड़े महानगरों और छोटे शहरों के बीच इलाज के खर्च में जो भारी अंतर है, उसे पाटना है।
प्रस्तावित ढांचे के तहत, मुंबई जैसे महंगे शहरों में पॉलिसीहोल्डर्स को हॉस्पिटल के बढ़ते खर्चों के हिसाब से प्रीमियम देना पड़ सकता है, जबकि नागपुर जैसे Tier-II शहरों में प्रीमियम की दरें कम रह सकती हैं। कंपनी एक 'को-पेमेंट' (Co-payment) सिस्टम भी लाने की योजना बना रही है, ताकि अगर कोई ग्राहक अपने तय जोन से बाहर इलाज कराता है, तो इंश्योरेंस पूल की स्थिरता बनी रहे।
साइबर सिक्योरिटी में एंट्री
हेल्थ सेक्टर के अलावा, कंपनी अब डिजिटल सुरक्षा पर भी दांव लगा रही है। भारत में ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ते चलन को देखते हुए, कंपनी साइबर-इंश्योरेंस प्रोडक्ट लॉन्च करेगी। ये प्लान ग्राहकों को अनधिकृत ट्रांजेक्शन और डेटा ब्रीच से होने वाले नुकसान से बचाएंगे। साथ ही, आइडेंटिटी थेफ्ट (Identity Theft) इंश्योरेंस के जरिए फ्रॉड के बाद डिजिटल प्रोफाइल को रिकवर करने में आने वाले कानूनी खर्च की भरपाई भी की जाएगी।
ओनरशिप स्ट्रक्चर
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि Generali Central Insurance एक जॉइंट वेंचर है, जिसमें Generali Group की हिस्सेदारी 74% और Central Bank of India की 26% है। चूंकि यह कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, इसलिए इसके शेयरों में कोई हलचल नहीं देखी जा सकती, लेकिन यह बदलाव भारतीय इंश्योरेंस सेक्टर में डेटा-आधारित नई Pricing Strategy के बड़े चलन को दिखाता है।
