जनरल इंश्योरेंस कंपनियां अब मोटर इंश्योरेंस सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही हैं। कंपनियों ने IRDAI से रिस्क-बेस्ड प्राइसिंग और 'नॉक-फॉर-नॉक' क्लेम सिस्टम को खत्म करने की मांग की है, जिससे निवेशकों की नजरें इंश्योरेंस कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर टिकी हैं।
बीमा कंपनियां अब मोटर इंश्योरेंस के पूरे स्ट्रक्चर को बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। कंपनियों ने IRDAI के सामने प्रस्ताव रखा है कि प्रीमियम तय करने का मौजूदा तरीका बदला जाए और इसे इंडिविजुअल रिस्क यानी चालक के रिस्क प्रोफाइल के आधार पर तय किया जाए। अभी प्रीमियम काफी हद तक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के दायरे में होता है।
डीलरों के बढ़ते दबदबे पर लगाम
बीमा कंपनियों का कहना है कि कार डीलर जो इंश्योरेंस एजेंट के रूप में काम करते हैं, वे रिपेयरिंग के दौरान छिपे हुए खर्चों और ओवरराइड्स के जरिए इंश्योरेंस के क्लेम अमाउंट को प्रभावित करते हैं। कंपनियां चाहती हैं कि रेगुलेटर इस पूरे इकोसिस्टम की बारीकी से जांच करे ताकि डिस्ट्रीब्यूशन खर्चों पर लगाम लगाई जा सके।
'नॉक-फॉर-नॉक' समझौते का अंत
इंडस्ट्री के दिग्गज 'नॉक-फॉर-नॉक' एग्रीमेंट को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल एक्सीडेंट होने पर हर इंश्योरर अपने पॉलिसीहोल्डर का खर्च उठाता है, चाहे गलती किसी की भी हो। इसे खत्म करने से जवाबदेही बढ़ेगी, लेकिन इसके साथ ही क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया अधिक जटिल और महंगी हो सकती है।
ड्राइवर-स्पेसिफिक पॉलिसी की तैयारी
कंपनियां अब गाड़ी के बजाय ड्राइवर की प्रोफाइल पर पॉलिसी देने की वकालत कर रही हैं। इससे गलत ड्राइविंग को रोकने में मदद मिलेगी और सटीक रिस्क असेसमेंट किया जा सकेगा। ग्राहक चाहें तो पुरानी अन-नेम्ड पॉलिसी भी ले सकेंगे, लेकिन उसके लिए उन्हें अधिक प्रीमियम चुकाना पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
ICICI Lombard और The New India Assurance जैसी लिस्टेड कंपनियों के लिए ये बदलाव लंबी अवधि में अंडरराइटिंग मार्जिन को सुधार सकते हैं। हालांकि, डी-रेगुलेशन के बाद बाजार में प्राइसिंग को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने का रिस्क भी बना रहेगा। निवेशकों की नजर अब IRDAI के अगले सर्कुलर पर है, जो इस पूरे सेक्टर की दिशा तय करेगा।
