इंडिविजुअल टर्म लाइफ इंश्योरेंस से **18%** GST हटने के एक साल बाद, बीमा पॉलिसियों की खरीद में **1.5 गुना** की जबरदस्त बढ़त दर्ज की गई है।
भारत सरकार द्वारा इंडिविजुअल टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम से 18% GST हटाने के बाद इंश्योरेंस सेक्टर में ग्राहकों के व्यवहार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 22 सितंबर, 2025 से लागू इस छूट के बाद से टर्म इंश्योरेंस की खरीद में 1.5 गुना की बढ़ोतरी हुई है।
बड़े कवर की ओर रुझान
GST हटने से प्रीमियम सस्ता हुआ है, जिसका फायदा उठाकर ग्राहक अब बड़ी पॉलिसियां ले रहे हैं। आज कुल टर्म इंश्योरेंस खरीद में से आधे से ज्यादा पॉलिसियां ₹1 करोड़ या उससे अधिक के सम अश्योर्ड (Sum Assured) वाली हैं। इसका मतलब है कि लोग कम खर्च में बेहतर सुरक्षा कवर चुन रहे हैं।
कौन खरीद रहा है ज्यादा पॉलिसियां?
इस बदलाव का असर खास तौर पर महिलाओं और होममेकर्स (Homemakers) में दिखा है। महिलाओं में इंश्योरेंस अपनाने की दर पुरुषों की तुलना में 27% तेज रही है, जबकि होममेकर्स सेगमेंट में यह बढ़त 60% तक देखी गई। वहीं, हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स और एनआरआई (NRI) ने ₹3 करोड़ से ऊपर के बड़े कवर लेने में खासी दिलचस्पी दिखाई है।
निवेशकों के लिए चेतावनी: इनपुट टैक्स क्रेडिट का गणित
हालांकि वॉल्यूम बढ़ना कंपनियों के लिए अच्छा है, लेकिन निवेशकों को मार्जिन पर नजर रखनी होगी। चूंकि व्यक्तिगत टर्म इंश्योरेंस अब GST-मुक्त है, इसलिए कंपनियां इन पॉलिसियों के संचालन (जैसे मार्केटिंग, ऑफिस खर्च) पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) क्लेम नहीं कर सकतीं। कंपनियों को यह लागत खुद वहन करनी होगी, जो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाल सकती है।
ग्रुप वर्सेस इंडिविजुअल मार्केट
ध्यान रखें कि यह राहत सिर्फ व्यक्तिगत बीमा पर है। कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को दिए जाने वाले 'ग्रुप टर्म इंश्योरेंस' पर अभी भी 18% GST लग रहा है। मार्केट अब इस बात पर नजर बनाए हुए है कि क्या यह 1.5 गुना की तेजी आगे भी बनी रहेगी या यह सिर्फ शुरुआती उत्साह का नतीजा था।
