GIC Re ने अपनी तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की ग्रॉस प्रीमियम इनकम में 10.2% का इजाफा हुआ, जो ₹10,986.55 करोड़ तक पहुंच गई। यह अच्छी बात है, लेकिन नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पर नजर डालें तो यह पिछले साल की इसी तिमाही के ₹1,621.35 करोड़ की तुलना में 6.3% घटकर ₹1,518.92 करोड़ पर आ गया।
अच्छी खबर यह है कि कंपनी के इन्वेस्टमेंट इनकम (Investment Income) में अच्छी खासी बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹2,627.17 करोड़ से बढ़कर ₹2,924.47 करोड़ हो गई। हालांकि, इंश्योरेंस बिजनेस के लिए सबसे अहम माने जाने वाले कंबाइंड रेशियो (Combined Ratio) में सुधार हुआ है। यह पिछले साल की 107.83% से घटकर 105.32% पर आ गया है। इसका मतलब है कि कंपनी क्लेम्स (Claims) और ऑपरेशनल खर्चों (Operational Expenses) पर प्रीमियम से होने वाली कमाई से ज्यादा खर्च कर रही है, भले ही यह रेशियो सुधरा है।
प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) की बात करें तो यह भी 2.4% घटकर ₹2,116.93 करोड़ रहा। लेकिन, कंपनी की बैलेंस शीट (Balance Sheet) काफी मजबूत दिख रही है। 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो (Solvency Ratio) सुधरकर 3.87 हो गया, जो पिछले साल 3.52 था। वहीं, नेट वर्थ (Net Worth) भी बढ़कर ₹48,490.40 करोड़ हो गया, जो कंपनी की मजबूत पूंजी स्थिति को दर्शाता है।
मुनाफे पर दबाव और कंबाइंड रेशियो के 100% से ऊपर रहने की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय (International) सेगमेंट में भारी नुकसान है। खासकर मोटर इंश्योरेंस में कंबाइंड रेशियो 190%, कार्गो (Cargo) में 282%, लाइफ (Life) में 138% और हेल्थ (Health) में 143% रहा। इन आंकड़ों से साफ है कि इन सेगमेंट में कंपनी को प्रीमियम से ज्यादा क्लेम चुकाने पड़ रहे हैं। इस वजह से, कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मार्केट शेयर (Market Share) को थोड़ा कम किया है, खासकर प्रॉपर्टी सेगमेंट में।
ग्लोबल इंश्योरेंस मार्केट में बढ़ते रिस्क जैसे जलवायु परिवर्तन, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव के चलते GIC Re अब अपने पोर्टफोलियो को ऑप्टिमाइज़ (Optimize) करने और घरेलू (Domestic) बिजनेस पर ज्यादा फोकस करने की रणनीति बना रही है। कंपनी का लक्ष्य अगले 3-5 सालों में डोमेस्टिक और इंटरनेशनल बिजनेस का अनुपात 60% डोमेस्टिक / 40% इंटरनेशनल रखना है। मैनेजमेंट का मानना है कि मार्केट की स्थिति सामान्य होने पर कंपनी अनुशासित अंडरराइटिंग (Disciplined Underwriting) और बेहतर क्लेम मैनेजमेंट (Claims Management) के दम पर अच्छा प्रदर्शन करेगी। कंपनी ने अगले 5 सालों के लिए 8-10% की मीडियम-टर्म ग्रोथ का लक्ष्य भी तय किया है।
अक्टूबर 2024 में GIC Re की क्रेडिट रेटिंग (Credit Rating) बहाल होना एक बड़ा कदम है, जिससे अगले 3-5 सालों में अंतरराष्ट्रीय बिजनेस को फिर से मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, कंपनी लगभग ₹2,000 करोड़ का स्ट्रेटेजिक कैट रिजर्व (Strategic CAT Reserve) भी बना रही है।
निवेशकों की नजर GIC Re की इस बात पर रहेगी कि वह कैसे अपने पोर्टफोलियो को बेहतर बनाती है और मुश्किल अंतरराष्ट्रीय सेगमेंट में अंडरराइटिंग प्रॉफिटेबिलिटी (Underwriting Profitability) को बढ़ाती है। डोमेस्टिक बिजनेस पर फोकस और रेटिंग बहाल होने के बाद अंतरराष्ट्रीय मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ाने की क्षमता पर नजर रखी जाएगी। कंपनी की मजबूत कैपिटल बेस और बेहतर सॉल्वेंसी रेशियो इसे किसी भी झटके से बचाने में मदद करेंगे।