जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) ने जून तिमाही में **9.7%** की बढ़त के साथ **₹1,922 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। प्रीमियम इनकम में इजाफे से कंपनी को यह बूस्ट मिला है। हालांकि, अंडरराइटिंग में घाटा जारी है और कंबाइंड रेशियो **100%** के ऊपर बना हुआ है। नतीजों के बाद NSE पर कंपनी का शेयर **2.14%** गिरकर बंद हुआ।
GIC Re के नतीजे: मुनाफे में 9.7% की उछाल
जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में ₹1,922.04 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है। पिछले साल की इसी अवधि में यह मुनाफा ₹1,752.23 करोड़ था, जो 9.69% की वृद्धि दर्शाता है।
प्रीमियम इनकम में 8.78% का इजाफा
कंपनी के मुख्य बिजनेस ऑपरेशंस में अच्छी ग्रोथ देखी गई। ग्रॉस प्रीमियम इनकम ₹13,475.36 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹12,388.01 करोड़ से 8.78% ज्यादा है। इससे पता चलता है कि रीइंश्योरर ने अपने बिजनेस का वॉल्यूम बढ़ाया है।
अंडरराइटिंग में घाटा जारी, कंबाइंड रेशियो 104.88%
हालांकि, बॉटम लाइन में ग्रोथ के बावजूद, कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में दबाव दिख रहा है। GIC Re ने तिमाही के दौरान ₹723.87 करोड़ का अंडरराइटिंग लॉस दर्ज किया है। पिछले साल इसी अवधि में यह लॉस ₹907.76 करोड़ था, जिसमें सुधार हुआ है। लेकिन, यह अभी भी बताता है कि कंपनी प्रीमियम से जितनी कमाई कर रही है, उससे ज्यादा क्लेम्स और ऑपरेशनल खर्चों में जा रहा है।
कंपनी का कंबाइंड रेशियो 104.88% रहा, जो पिछले साल के 106.94% से बेहतर है। इंश्योरेंस इंडस्ट्री में, 100% से ऊपर का कंबाइंड रेशियो बताता है कि अंडरराइटिंग बिजनेस खुद से मुनाफा नहीं कमा रहा है। ऐसे में, कंपनी को कुल मुनाफा कमाने के लिए इन्वेस्टमेंट इनकम (अपने कैश रिजर्व को निवेश करके कमाया गया पैसा) पर निर्भर रहना पड़ता है।
मजबूत सॉल्वेंसी पोजीशन
अंडरराइटिंग की चुनौतियों के बावजूद, GIC Re ने अपनी सॉल्वेंसी पोजीशन मजबूत बनाए रखी है। 30 जून 2026 तक सॉल्वेंसी रेशियो 4.32 था, जो पिछले साल के 3.85 से बेहतर है। यह रेशियो एक इंश्योरर की अपनी लॉन्ग-टर्म डेट और क्लेम ऑब्लिगेशन्स को पूरा करने की क्षमता को मापता है।
नतीजों के बाद शेयर में गिरावट
इन नतीजों के बाद, GIC Re के शेयर गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 2.14% गिरकर ₹348.20 पर बंद हुए। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनी क्लेम को कैसे मैनेज करती है, खासकर गुजरात में आई बाढ़ जैसी कैटास्ट्रॉफिक मौसमी घटनाओं और ग्लोबल मार्केट की वोलेटिलिटी के जोखिमों को देखते हुए, जो इन्वेस्टमेंट इनकम को प्रभावित कर सकती हैं। कंपनी का भविष्य का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपने रिस्क को कितनी प्रभावी ढंग से प्राइस कर पाती है और डोमेस्टिक व इंटरनेशनल मार्केट्स में ऑपरेशनल कॉस्ट को कैसे कंट्रोल करती है।
