देश के फायर इंश्योरेंस सेक्टर में भारी हलचल है। अप्रैल से जुलाई **2026** के बीच प्रीमियम कलेक्शन **28%** घटकर **₹10,062 करोड़** रह गया है, जिसका मुख्य कारण कंपनियों के बीच छिड़ी कीमतों की जंग है।
बाजार हिस्सेदारी की होड़ में नुकसान
इन्श्योरेंस कंपनियों के बीच मार्केट शेयर हथियाने की होड़ इस कदर बढ़ गई है कि वे कॉरपोरेट और इंडस्ट्रियल फायर पॉलिसीज पर भारी डिस्काउंट दे रही हैं। बीते साल इसी अवधि में प्रीमियम कलेक्शन ₹14,063 करोड़ था, जो अब फिसलकर ₹10,062 करोड़ पर आ गया है।
प्रमुख खिलाड़ियों पर असर
- New India Assurance: प्रीमियम ₹2,241 करोड़ से घटकर ₹1,681 करोड़ रह गया।
- ICICI Lombard: पोर्टफोलियो ₹1,815 करोड़ से गिरकर ₹1,248 करोड़ पर आ गया।
- Go Digit: कलेक्शन ₹413 करोड़ से लुढ़ककर ₹223 करोड़ रह गया।
IRDAI ने क्यों बजाया खतरे का घंटी?
रेगुलेटर IRDAI ने इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाया है। कुछ मामलों में डिस्काउंट 99% तक पहुंच गए हैं, यानी पॉलिसी लगभग मुफ्त में बेची जा रही है। फायर इंश्योरेंस में जोखिम बड़ा होता है, और ऐसे 'थिन प्रीमियम' (बहुत कम प्रीमियम) के साथ किसी भी बड़े हादसे के समय क्लेम चुकाने की क्षमता पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।
अब रेगुलेटर ने कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे डिस्काउंटिंग का यह खेल बंद करें और प्रीमियम को जोखिम (Actuarial principles) के आधार पर ही तय करें। निवेशकों के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कंपनियां अपनी अंडरराइटिंग अनुशासन को फिर से पटरी पर ला पाती हैं या नहीं।
