Crop Insurers: महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र में सूखे की मार, बीमा कंपनियों पर बढ़ेगा क्लेम का बोझ

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Crop Insurers: महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र में सूखे की मार, बीमा कंपनियों पर बढ़ेगा क्लेम का बोझ

महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में सूखे के कारण फसल बीमा क्लेम (Crop Insurance Claims) में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इस फाइनेंशियल ईयर में प्रीमियम कलेक्शन घटकर **₹20,000 करोड़** रहने का अनुमान है, जिससे बीमा कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बन सकता है।

भारत के जनरल इंश्योरेंस सेक्टर के लिए सूखे के हालात बड़ी मुसीबत लेकर आए हैं। बारिश की कमी से फसल की पैदावार प्रभावित हुई है, जिससे बीमा कंपनियों को अब भारी-भरकम क्लेम भुगतान की तैयारी करनी पड़ रही है। पिछले साल के ₹30,000 करोड़ के मुकाबले इस बार प्रीमियम कलेक्शन के सिमटकर ₹20,000 करोड़ रहने की संभावना है, जो सेक्टर के लिए चिंता का विषय है।

राज्यों के अलग-अलग रिस्क मॉडल

बीमा कंपनियों का वित्तीय बोझ इस बात पर निर्भर करेगा कि किस राज्य में कौन सा रिस्क-शेयरिंग मॉडल लागू है। महाराष्ट्र में 80:110 का स्ट्रक्चर है। इसका मतलब है कि 80% से 110% के बीच के क्लेम की जिम्मेदारी कंपनियों की है। अगर क्लेम 110% से ऊपर जाता है, तो राज्य सरकार उसकी भरपाई करेगी। महाराष्ट्र में कुल प्रीमियम पूल पिछले साल के ₹3,400 करोड़ से घटकर इस साल ₹1,400 करोड़ रह गया है, जिससे कंपनियों की लायबिलिटी कैप लगभग ₹1,540 करोड़ सीमित हो गई है।

कर्नाटक में फुल रिस्क एक्सपोजर

महाराष्ट्र के विपरीत, कर्नाटक में 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' के तहत पूरा रिस्क बीमा कंपनियों पर है। वहां कोई रिस्क-शेयरिंग कॉरिडोर नहीं है, जिसका मतलब है कि नुकसान की पूरी जिम्मेदारी कंपनियों की है।

निवेशकों के लिए अहम क्या है?

Agriculture Insurance Company of India सहित तमाम अंडरराइटर्स अब फील्ड में जाकर फसल कटाई के प्रयोग कर रहे हैं ताकि नुकसान का सही अंदाजा लगाया जा सके। निवेशकों को अब इन कंपनियों के 'कंबाइंड रेशियो' (Combined Ratio) पर नजर रखनी चाहिए, जो यह बताता है कि कंपनियां अपने प्रीमियम के मुकाबले क्लेम और खर्चों पर कितना पैसा खर्च कर रही हैं। नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल पर डेटा आने के बाद ही साफ होगा कि आने वाली तिमाही में इन कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर कितनी चोट पहुंचेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.