कैंसर के बढ़ते खर्च से हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में क्रांति
भारत में कैंसर के इलाज का भारी-भरकम खर्च, जो अब एडवांस्ड स्टेज में ₹20-30 लाख तक जा पहुंचा है, हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट को एक नई दिशा दे रहा है। Care Health Insurance की तरफ से जारी डेटा बताता है कि कैंसर के शुरुआती चरण के इलाज पर भी करीब ₹5-7 लाख का खर्चा आता है। ऐसे में, कई पॉलिसीहोल्डर्स के मौजूदा कवरेज की सीमाएं कम पड़ रही हैं, जिससे उन्हें अपनी जेब से बड़ा अमाउंट खर्च करना पड़ रहा है। इसी वजह से हेल्थ और क्रिटिकल इलनेस (CI) इंश्योरेंस सेगमेंट में ज़बरदस्त ग्रोथ देखी जा रही है।
क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस की तूफानी डिमांड
खासकर क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस मार्केट की ग्रोथ का अनुमान काफी शानदार है। अगले कुछ सालों में, यानी 2035 तक, यह मार्केट करीब 7.08% के CAGR से बढ़कर USD 32.5 बिलियन तक पहुंच सकता है। इसकी मुख्य वजह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का बढ़ता प्रकोप है। भारत में कैंसर के मामले 2012 में लगभग 10 लाख से बढ़कर 2022 में 14.6 लाख हो गए हैं, और 2025 तक इनके 15.7 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। इन बीमारियों के लंबे और महंगे इलाज से लोगों की आर्थिक स्थिति पर भारी बोझ पड़ता है, जिससे वे और भी मजबूत इंश्योरेंस कवर तलाश रहे हैं। इसी को देखते हुए इंश्योरेंस कंपनियां अब सम एश्योर्ड के ऑप्शन बढ़ा रही हैं और कवर होने वाली बीमारियों का दायरा भी बढ़ा रही हैं।
प्रोडक्ट्स में इनोवेशन और कॉम्पिटिशन
इंश्योरेंस कंपनियां ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपने प्रोडक्ट्स में लगातार नए बदलाव कर रही हैं। Care Health Insurance एडवांस्ड कैंसर के मामलों के लिए कम से कम ₹15-25 लाख का सम एश्योर्ड रखने की सलाह दे रही है। दूसरी तरफ, Bajaj Allianz और Bharti AXA Life जैसी कंपनियां ₹1 लाख से लेकर ₹2 करोड़ तक के सम एश्योर्ड के ऑप्शन दे रही हैं, जबकि Care Health तो ₹6 करोड़ तक का कवर ऑफर कर रही है। साथ ही, कंपनियां इस बात पर भी फोकस कर रही हैं कि वे कितनी क्रिटिकल बीमारियों को कवर करती हैं। कुछ पॉलिसियां 64 तक की बीमारियों से सुरक्षा देती हैं, तो कुछ कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी मुख्य बीमारियों पर ध्यान केंद्रित करती हैं। इस कॉम्पिटिशन की वजह से इंश्योरर्स को अपने अंडरराइटिंग तरीकों को बेहतर बनाना पड़ रहा है और कैशलेस ट्रीटमेंट की सुविधा के लिए नेटवर्क हॉस्पिटल्स का विस्तार भी करना पड़ रहा है। बजट 2026 में किफायती कैंसर ड्रग्स और डोमेस्टिक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों से इलाज का खर्च कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, भारत में हेल्थ इंश्योरेंस की पैठ अभी भी कम है, केवल लगभग 7-8% आबादी के पास ही क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी है।
आगे की राह: बढ़ते दावों और बाजार की संभावनाओं के बीच
हेल्थ इंश्योरेंस इंडस्ट्री को बढ़ती जागरूकता और कैंसर कवर की जरूरत के चलते काफी फायदा होने वाला है। पिछले तीन सालों में, मेडिकल खर्चों में बढ़ोतरी और गंभीर बीमारियों के कारण हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम्स में लगभग 30% की वृद्धि देखी गई है। इंश्योरेंस कंपनियों को ग्राहकों की इस बढ़ती मांग और दावों के भुगतान के बढ़ते बोझ के बीच संतुलन बनाना होगा। इसके लिए, वे जल्दी बीमारी का पता लगाने और रोकथाम को बढ़ावा देने, डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने और अलग-अलग आयु वर्ग व बीमारी प्रोफाइल के हिसाब से खास प्रोडक्ट्स बनाने जैसी रणनीतियों पर काम कर रही हैं। बढ़ती हेल्थकेयर खर्च, सरकारी नीतियों के समर्थन और गंभीर बीमारियों के लिए वित्तीय तैयारी को लेकर ग्राहकों में बढ़ती जागरूकता के मेल से बाजार में लगातार विस्तार होने की उम्मीद है।
