Bombay HC का बड़ा फैसला: बीमा कंपनियां अब 'देरी' पर नहीं खारिज कर पाएंगी हॉस्पिटलाइजेशन क्लेम, पॉलिसीधारकों को मिली बड़ी राहत

INSURANCE
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Bombay HC का बड़ा फैसला: बीमा कंपनियां अब 'देरी' पर नहीं खारिज कर पाएंगी हॉस्पिटलाइजेशन क्लेम, पॉलिसीधारकों को मिली बड़ी राहत
Overview

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि बीमा कंपनियां अब सिर्फ पॉलिसी फाइल करने में हुई देरी के आधार पर हॉस्पिटलाइजेशन क्लेम को खारिज नहीं कर सकतीं। इस अहम फैसले में कोर्ट ने United India Insurance को एक पॉलिसीहोल्डर को **₹1.13 लाख** का भुगतान करने का आदेश दिया है, साथ ही **6%** सालाना ब्याज भी देना होगा।

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पॉलिसीधारकों के अधिकार हुए मजबूत

बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले से अब पॉलिसीधारकों का पलड़ा भारी हो गया है। कोर्ट ने साफ किया है कि क्लेम रिजेक्ट करने वाली टाइम-बार क्लॉज (समय-सीमा वाली शर्तें) अमान्य हैं। इसका मतलब है कि बीमा कंपनियों के लिए सिर्फ प्रशासनिक नियमों के बजाय, असल बीमा कवर (Insurance Cover) ज्यादा मायने रखेगा। यह फैसला, खासकर हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर के लिए बड़ा है, जहाँ क्लेम से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।

बीमा कंपनियों पर क्या होगा असर?

इस रूलिंग का सीधा असर United India Insurance Company (UIIC) जैसी सरकारी बीमा कंपनियों पर पड़ेगा। आपको बता दें कि UIIC का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लिस्टेड कंपनियों की तरह सार्वजनिक नहीं किया जाता है। हालांकि, इस फैसले से वित्तीय दबाव बढ़ने की आशंका है। UIIC के साथ-साथ New India Assurance (जिसका क्लेम सेटलमेंट रेशियो 98.91% है) और HDFC ERGO (जिसका 96.71% CSR है) जैसी कंपनियों को भी अपने क्लेम सेटलमेंट (Claim Settlement) प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी होगी। अनुमान है कि अब बीमा कंपनियों को तकनीकी देरी के बजाय, क्लेम का भुगतान ज्यादा कुशलता से और स्पष्टता से करना होगा। आपको बता दें कि पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में हेल्थ इंश्योरेंस की शिकायतों में 41% की भारी वृद्धि हुई थी, जिसमें क्लेम डिनायल, देरी या आंशिक भुगतान जैसे मुद्दे 70% तक थे।

फैसले के पीछे कानूनी आधार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह फैसला Indian Contract Act, 1872 की धारा 28(b) के तहत दिया है। यह धारा किसी भी ऐसे एग्रीमेंट को अमान्य करती है जो किसी पक्ष के अधिकारों को एक निश्चित समय के बाद समाप्त कर देता है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के अनुरूप है, जिनमें 2022 में The Oriental Insurance Company से जुड़ा एक अहम मामला भी शामिल था। कोर्ट ने बीमा कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली छोटी समय-सीमाओं, जैसे UIIC के मामले में 90 दिन, पर सवाल उठाया है। भले ही 2008 के कुछ पुराने सुप्रीम कोर्ट निर्णयों में कॉन्ट्रैक्ट की समय-सीमाओं को कुछ हद तक समर्थन मिला था, लेकिन अब नए फैसलों और धारा 28 की बदली हुई व्याख्याएं पॉलिसीधारकों के हक में हैं।

फाइनेंशियल दबाव और सेक्टर के जोखिम

पॉलिसीधारकों के लिए यह जीत भले ही बड़ी हो, लेकिन यह बीमा कंपनियों पर काफी ऑपरेशनल और फाइनेंशियल दबाव डालेगी। इंश्योरेंस सेक्टर, खासकर हेल्थ इंश्योरेंस, पहले से ही बढ़ती शिकायतों से जूझ रहा है। क्लेम से जुड़े विवादों का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं शिकायतों से आता है। इस जजमेंट के बाद, बीमा कंपनियों को क्लेम के लिए ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है, जिसका असर उनके मुनाफे पर भी दिख सकता है। Star Health जैसी कंपनियां जहां 99.81% (FY24-25) के उच्च क्लेम पेड रेशियो (Claim Paid Ratio) की रिपोर्ट करती हैं, वहीं क्लेम प्रोसेसिंग में समस्याओं की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि सिर्फ समय-सीमा ही नहीं, बल्कि क्लेम के निपटारे के तरीके में भी सुधार की जरूरत है।

इंडस्ट्री-व्यापी असर

यह फैसला एक मिसाल कायम करेगा और बीमा कंपनियों को अपनी पॉलिसी की शर्तों और क्लेम हैंडलिंग के तरीकों को अपडेट करने के लिए मजबूर करेगा। अब पॉलिसीहोल्डर इस स्पष्ट रूलिंग के साथ और मजबूती से अपने क्लेम पेश कर सकते हैं। इंडस्ट्री के लिए, यह एक ज्यादा पारदर्शी और स्पष्ट क्लेम डिसिजन की ओर एक रणनीतिक कदम होगा। हो सकता है कि कंपनियों को कस्टमर सर्विस और डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन (Dispute Resolution) में ज्यादा निवेश करना पड़े, जिससे ग्राहकों का भरोसा बना रहे। Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) भी इस बात पर नजर रखेगा कि इस फैसले को कैसे अमल में लाया जाता है, खासकर सेक्टर में बढ़ती पॉलिसीहोल्डर शिकायतों को देखते हुए।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.