Bajaj Allianz के MD तपन सिंघेल ने इंश्योरेंस सेक्टर के मैनेजमेंट खर्चों पर जारी IRDAI की समीक्षा के बीच अपना पक्ष रखा है। कंपनी का कहना है कि वे एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों से ज्यादा ग्राहकों को मिलने वाले क्लेम सेटलमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं।
खर्चों पर रेगुलेटर की नजर
इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI इन दिनों इंश्योरेंस कंपनियों के 'Expenses of Management' (EoM) फ्रेमवर्क की बारीकी से समीक्षा कर रहा है। इसी बीच, Bajaj Allianz General Insurance के MD और CEO तपन सिंघेल ने साफ किया है कि इंडस्ट्री का फोकस एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों को बढ़ाने के बजाय पॉलिसीधारकों को बेहतर सर्विस देने पर है।
क्लेम और प्रॉफिट का गणित
इस चर्चा के केंद्र में 'लॉस रेशियो' (Loss Ratio) है। कंपनी के मुताबिक, इंश्योरेंस इंडस्ट्री का लॉस रेशियो साल 2015 में 86.2% था, जो अब बढ़कर 87.3% हो गया है। एक ऊंचे लॉस रेशियो का मतलब है कि कंपनी प्रीमियम के मुकाबले ग्राहकों को क्लेम के रूप में ज्यादा पैसा लौटा रही है। हालांकि, ऊंचे ऑपरेशनल खर्चों के चलते 'कंबाइंड रेशियो' (Combined Ratio) अक्सर 100% से ऊपर चला जाता है, जिससे कई कंपनियों को मुनाफे के लिए अंडरराइटिंग के बजाय निवेश से होने वाली आय पर निर्भर रहना पड़ता है।
प्रीमियम में आई भारी गिरावट
कंपनी ने बाजार में कॉम्पिटिशन को साबित करने के लिए कुछ बड़े आंकड़े पेश किए हैं। साल 2007 में मार्केट-डिटरमाइंड प्राइसिंग सिस्टम लागू होने के बाद से:
- मोटर इंश्योरेंस: प्रीमियम में लगभग 70% की गिरावट आई है।
- फायर इंश्योरेंस: प्रीमियम 60% से 70% तक सस्ते हुए हैं।
- क्रॉप इंश्योरेंस: लागत में 30% की कमी आई है।
Bajaj Allianz का कहना है कि ये आंकड़े बताते हैं कि बाजार पहले से ही काफी प्रतिस्पर्धी है और लगातार ग्राहकों के लिए प्रीमियम कम हो रहे हैं। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि रेगुलेटर की ओर से कमीशन स्ट्रक्चर या एक्सपेंस कैप में कोई बदलाव आता है या नहीं, क्योंकि इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।
